सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 105

हिन्दुत्वके तीन लक्षण ८६
जाति रक्तके प्रियतम बन्धनोंसे बंधी हुई एक अखण्ड जाति है।
ऐसा हम अपने अन्तःकरणमें अनुभव करते हैं और इसलिये यह
ऐसा ही है।
यदि ठीक विचार किया जाय तो सारे संसारकी मनुष्य-
जाति एक ही है; क्योंकि मनुष्य-रक्तसे ही यह उत्पन्न हुई और
मनुष्यका रक्त ही इसमें प्रवाहित हो रहा है। यह पूर्ण सत्य है,
बाकी सब बातें अपेक्षाकृत सत्य हैं। जाति-जातिके बीचमें मनुष्य
जो कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है, उसे प्रकृति बराबरसे ही नष्ट
करती चली आ रही है। रक्त-मिश्रणको रोकनेका प्रयत्न बालूकी
भीत उठाना मात्र है। सब धर्माचार्योंकी सब आज्ञाओंकी
अपेक्षा स्त्री-पुरुषका परस्पर प्रेमाकर्षण अधिक बलवान प्रमाणित
हुआ है। यही नहीं, बल्कि अन्दमान द्वीपके आदिम निवासियोंमें
भी आर्यरक्तके तुषार परस्पर मिले हुए हैं। मनुष्य अधिकसे
अधिक जो कुछ दावा कर सकता है और इतिहास भी इस संबं-
धमें जो कुछ बतलाता है वह यही है कि मनुष्यमात्रके शरीरमें
समग्र मानव-जातिका रक्त प्रवाहित हो रहा है। इस ध्रुवसे उस
ध्रुवतक समग्र मानव-जातिकी एकता ही अखंड सत्य है। अन्य
बातें अंशतः और सापेक्षतः सत्य हैं।
इस सापेक्ष विचारकी दृष्टिसे देखें तो संसारमें दो ही
जातियां ऐसी हैं, एक हिन्दू और दूसरी यहूदी, जो अधिकारके
साथ यह कह सकती हैं कि हम एक जाति हैं। एक हिन्दू यदि
किसी अन्य उपजातिके हिन्दूसे विवाह करे तो बहुत होगा अपनी