हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८. हिन्दुत्व
ही और सबमें जो रक्त था वह भी था एक हिन्दू-रक्त ही। हम
लोगोंमेंसे कुछ ब्राह्मण हैं, कुछ नमःशूद्र हैं। पर कोई ब्राह्मण हो या
चांडाल, हैं सब हिन्दू ही और सबका रक्त है भी एक हिन्दू-रक्त
ही। हम लोगोंमेंसे कोई दाक्षिणात्य हैं, कोई गौड़ हैं; पर गौड़
हों या सारस्वत, हैं सब हिन्दू ही और सबका रक्त भी है एक
हिन्दू-रक्त ही। हम लोगोंमेंसे कोई राक्षस थे और कोई यक्ष; पर
राक्षस हों या यक्ष, हैं हम सब हिन्दू ही और हमारा रक्त भी है
एक हिन्दू-रक्त ही। हमलोगोंमें कोई वानर थे और कोई किन्नर;
पर वानर हों या नर, हम हैं सब हिन्दू ही और हमारा रक्त
भी है एक हिन्दू-रक्त ही। हमलोगोंमें कोई जैन हैं और कोई
जङ्गम; पर जैन हों या जङ्गम, हम सब हैं हिन्दू ही और हमारा
रक्त भी है एक हिन्दू-रक्त ही। हमलोगोंमें कोई एकेश्वरवादी हैं,
कोई अनेकेश्वरवादी; कोई आस्तिक हैं, कोई नास्तिक; पर ईश्वर-
वादी हों या नास्तिक, हैं हम सब हिन्दू ही और हमारा रक्त भी है
एक हिन्दू-रक्त ही। हम केवल एक राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि एक जाति
हैं, जन्मसे ही भाई भाई हैं। और कुछ कोई चीज नहीं; यहां
तो हृदयकी एकताका प्रश्न है। हम यह अनुभव करते हैं कि वही
रक्त जो राम और कृष्ण, बुद्ध और महावीर, नानक और चैतन्य,
बसव और माधव, रोहिदास और तिरुवेल्लुवर इनकी नसोंमें
प्रवाहित होता था; वही रक्त समग्र हिन्दू-जातिकी नसोंमें प्रवा-
हित होता और प्रत्येक हिन्दूके हृदयमें स्पन्दन करता है। हम-
लोग यह अनुभव करते हैं कि हम सब एक जातिके हैं और यह