हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वके तीन लक्षण , ८७
न पश्चिमाम् । सर्वांस्तान् धार्मिको राजा शूद्रकर्मणि योजयेत् ॥" यह
केवल धमकी ही नहीं थी—ऐसा होता भी था । बहुतसे क्षत्रिय
कृषिकर्म या अन्य व्यवसाय करने लगे, इससे क्षत्रियके पदसे च्युत
हो गये और अन्य जातियोंके बने । इसी प्रकार बहुतसे वीर पुरुष
और कभी कभी तो समस्त जातिके सब मनुष्य अपने शौर्य और
पराक्रमसे क्षत्रिय पदको प्राप्त होकर क्षत्रिय कहलाने लगे। एक
जातिसे बहिष्कृत होकर दूसरी जातिमें मिल जाना, यह बात तो
एक मामूली बात हो गयी थी।
वैदिक आज्ञासे स्थापित चातुर्वर्ण्यके माननेवालोंकी ही नहीं,
बल्कि हिन्दू-जातिके अवैदिक संप्रदायोंकी भी यही बात है। जैसे
बौद्धकालमें यह बात थी कि एक ही घरमें पिता यदि बौद्ध हैं
तो माता वैदिक हैं और पुत्र जैन हैं; वैसे ही आज भी गुजरातमें
जैनों और वैष्णवोंमें परस्पर शादी ब्याह होता है, मारवाड़ और
राजपूतानेमें भी होता है और पंजाब और सिन्धमें सिख और
सनातनियोंमें भी परस्पर ऐसा ही संबंध है। इसके अतिरिक्त
आज जो मानभाव या लिंगायत या सिख या सतनामी हैं वे कल
हिन्दू थे और आजके कोई हिन्दू कल ब्राह्मो, लिंगायत या सिख हो
सकते हैं। पर जातिकी एकता और अखंडता वैसी ही बनी
हुई है।
इस जातीय एकताकी पूर्ण अभिव्यक्ति करनेवाला कोई ऐसा
दूसरा शब्द नहीं है जैसा कि हिन्दू है। हम लोगोंमेंसे कोई आर्य
थे और कोई अनार्य । पर कोई आयर हो या नायर, थे सब हिन्दू