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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 167 में से

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८६ हिन्दुत्व
अवलम्बन कर सन्तान जननेकी अनुमति अपनी स्त्रियोंको दी।
और उन स्त्रियोंने अज्ञात जातिके पुरुषोंके प्रेमकी याचना करके
महाभारतके नायकोंको उत्पन्न किया। इसी प्रकार उस कालके
कर्ण, बभ्रुवाहन, घटोत्कच, विदुर तथा अन्य व्यक्तियोंके इति-
हासका उल्लेख न करके उससे बहुत इधर आधुनिक कालके
चंद्रगुप्तका ही उदाहरण देखनेके लिये हम अपने पाठकोंसे कहते
हैं। चंद्रगुप्तने एक ब्राह्मणकन्यासे विवाह किया और इनसे
अशोकके पिताकी उत्पत्ति हुई। और इस अशोकने युवराज रहते
एक वैश्यकन्यासे विवाह किया। हर्ष वैश्य था और उसने
अपनी कन्या एक क्षत्रिय राजपुत्रको ब्याह दी। व्याधकर्मा एक
व्याधका पुत्र था और उसकी माता उस व्याधकी सहधर्मिणी एक
विप्रकन्या थी। और यह व्याधकर्मा विक्रमादित्यका यज्ञाचार्य
हुआ था। कृष्ण भट्ट ब्राह्मण होकर भी एक चांडालकन्यापर
इतना मोहित हुआ कि उसने खुल्लमखुल्ला उससे विवाह किया।
इसने फिर "मातंगी पन्थ" नामका एक धर्म-सम्प्रदाय चलाया।
ये सब लोग हिन्दू ही कहलाते थे और आज भी उन्हें कोई अहिन्दु
नहीं कहता। उन्हें हिन्दू कहलानेका अधिकार भी है। पर बात
यहीं खतम नहीं होती। यह भी हो सकता है कि कोई स्त्री या
पुरुष अपने अच्छे-बुरे कर्मसे एक जातिसे उन्नत या च्युत होकर
दूसरी जातिमें मिल सकते हैं। "शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति
शूद्रताम्।” "न कुलं कुलमित्याहुराचारं कुलमुच्यते। आचार
कुशलो राजन् इह चामुत्र नंदते ॥ उपासते ये न पूर्वा द्विजा संध्यां