सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 101, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 101

हिन्दुत्वके तीन लक्षण ८५
और इन उपजातियोंके परस्पर सम्बन्धसे उत्पन्न हुई सन्ततिके
ही सम्बन्धमें नहीं है, बल्कि अति प्राचीन कालमें गिरोह बनाकर
सबसे अलग पृथक् पृथक् रहनेवाली "जङ्गली" जातियोंके सम्बन्धमें
भी यही बात है। इसका दृष्टांत यदि देखना हो तो मलाबार या
नेपालमें देखिये। वहां उच्चकुलके हिन्दुओंको अन्य याने हिंद्वेतर
जातियोंकी कन्याओंसे विवाह करनेकी अनुज्ञा है। ये जातियां
आर्येतर हैं यह कल्पना ठीक भी हो तौभी इन जातियोंने हिन्दू-
संस्कृतिकी रक्षा करनेमें जो प्रेम और पराक्रम दिखाया उससे वे
हिन्दू-जातिमें मिला ली गयीं, यही नहीं, बल्कि सब बन्धनोंमें जो
सबसे कोमल बन्धन है उस विवाह-बन्धनसे उन्हें सदाके लिये
हिन्दू-जातिसे बांध रखा है। नागवंश क्या द्राविड़ वंश है ? नहीं,
फिर भी जब अग्निवंशके पुरुषोंको नागकन्याएं अर्पण की गयीं
और इन दोनों वंशोंमें जब चन्द्रवंश और सूर्यवंशके क्षत्रियोंने
अपनी कन्याओंको ब्याह दिया तब इनमें उनमें भेद ही क्या
रहा ? बौद्धोंके समयमें जब चातुर्वर्ण्य और जाति-भेदके बन्धन
टूट चुके थे तबकी बात ही जाने दीजिये। पर इधर हर्षवर्धन-
तक भी वही बात थी-परस्पर विवाह बराबर हुआ करते थे।
पांडवोंके ही कुलका दृष्टान्त लीजिये। पराशर ऋषि ब्राह्मण
थे। एक धीवरकी रूपवती कन्यापर वे मुग्ध हुए और इन्हींकी
सन्तान जगद्विख्यात कृष्णद्वैपायन भगवान वेदव्यास हुए। इन
व्यास भगवानने क्षत्रिय कुलकी राजकन्या अंबा और अंबालिकासे
दो पुत्र उत्पन्न किये। इन दो पुत्रोंमेंसे पांडने "नियोग" पद्धतिका