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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 254 में से

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करते हुए अब्दाली के मुक़ाबले में हमसे सहायता की प्रार्थना की है।
मेरा विचार उसे सिंध के पार पड़े राज्य के हिस्से का गवर्नर बना देने
तथा उसकी रक्षा के लिये कुछ सेना भेज देने का है । इस समय मेरा
दक्खिन को लौटना परमावश्यक है । मेरे उत्तराधिकारी देखेंगे कि यह
मेरी बड़ी आशा फलित होगी । काबुल और कन्धार में नियमानुसार
हम लोगों का शासन प्रारम्भ हो जायगा ।”
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हिन्दू-पद-पादशाही
ꕤ इरानपासुनि फिरंगनापर्यंत शत्रुची उथे फौजी ।
सिंधुपासुनि सेतुबन्धपर्यंत रणांगण भू माजली ॥
तीन खंडिच्या पुंडांची ती परन्तु सेना बुडेविली ।
सिंधुपासुनी सेतुवन्धपर्यंत समरभू लढवीली ॥
वर्षा काल समीप होने के कारण रघुनाथराओ पत्र लिखने के पश्चात्
शीघ्र ही सेना के साथ दक्षिण को लौट आया । यह बड़े दुर्भाग्य की बात
हुई कि उसे ऐसा करना पड़ा और नये जीते हुए सूबों को, जहां सेना
भी कम रक्खी गई थी. सहसा छोड़ना पड़ा । सब से भयानक बात तो
यह थी कि पठानों का षड्यन्त्रकारी नेता नजीबखां, जो 'पकड़ लिया
गया था और जिसे अब्दाली के साथ मिल कर मरहठों को धोखा
देने के कारण सारे मरहठा-सरदारों ने मार डालना ही श्रेयस्कर समझा
था, अभी तक जीवित था और उसका कोई उचित प्रबन्ध न हो सका था ।
ꕤ ईरान से लेकर गोआ तक शत्रु फैले हुए थे । सिंध से लेकर रामेश्वर तक
समरभूमि बन चुकी थी । विदेशियों की सेना में तीन द्वीपों की सेनायें सम्मिलित
थीं, पर हमने सिंध से लेकर रामेश्वर तक उन से युद्ध जारी रखा और उनको परा-
जित कर दिया ।