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हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 254 में से

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पृष्ठ 63

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इस प्रकार सिद्दी को परास्त किया गया और वह हिन्दू
के अधीन एक छोटी सी रियासत के रूप में दिन काटने लगा।
पुर्तगेजों को मरहठों के साथ अकेले ही लड़ना पड़ा। जब से न०।
की शक्ति का विकास हुआ था तब से उनको भारत में
विजयों और खम्बयात से लेकर लंका तक सारे पश्चिमी भाग
छाये हुए प्रभाव का धीरे २ ह्रास हो रहा था। उनके द्वारा धर्म
किये हुए उनके अत्याचार मुसलमानों की अपेक्षा किसी तरह से
भी कम भयंकर न थे। पुर्तगेजी कोंकण के पीड़ित हिन्दुओं ने जब देखा
कि सिद्दियों के अधीन रहने वाले कोंकण निवासियों ने अपनी दासता
की जंजीरें काट दी हैं तो उन्होंने भी मरहठा सेना से सहायता पाने
की आशा प्रकट की। वहां के सारे हिन्दुओं में देश भक्ति की लहर
दौड़ गई, और उन्होंने विधर्मियों के हिन्दुत्व को नष्ट कर देने के
पागलपन का मुक़ाबला बड़ी दृढ़ता से करना आरम्भ कर दिया। जब
मराठी सेना उनकी सीमा पर पहुँच गई तो पुर्तगेज भय के कारण
पागल से हो गए और उन्होंने हिन्दुओं के आन्दोलन को दबाने के
लिए घोर अत्याचार करने आरम्भ कर दिये। पुराने लिखित प्रमाणों
से पता लगता है कि उन्होंने बड़ी अधिक मात्रा में हिन्दू ज़मींदारों
की सम्पत्तियां जब्त कर लीं। सारे ग्रामों को घेर कर उन्हें तलवार के जोर
से ईसाई बना लिया। वे हिन्दू बच्चों को उठा कर ले गये। जिन
व्यक्तियों ने अपने धर्म को न छोड़ा उन्हें या तो पकड़ कर क़त्ल कर
दिया या उन्हें दास बना लिया। ब्राह्मण विशेष कर उनके रोष के
शिकार हुए। उन्हें घरों में ही क़ैद कर दिया गया। सारी हिन्दू जाति
को अपने उत्सव मनाने की भी मनाही कर दी गई। यदि कोई हिन्दू
अपने उत्सव मनाने का साहस भी करता तो उसका घर घेर लिया
जाता था। और उसके घर से सारे प्राणियों को धार्मिक न्यायालयों के
सम्मुख पेश किया जाता। वहां उन्हें या तो ज़बरदस्ती से ईसाई बना
लिया जाता था या उन्हें दास बना कर बेच दिया जाता था अथवा