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सर्वकोश
हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

Hastyayurveda Gajashastra of Palakapya Muni with Commentary

पालकाप्य मुनि (सम्पादक: पं. शिवदत्त शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished742 पृष्ठ

पृष्ठ 686, कुल 742 में से

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पृष्ठ 686

! Look at गुग्गुलो then र् on च?
Wait, तच्छान्त्यै गुग्गुलोर्...
Is it र्लेपः?
LOOK AT IT: गुग्गुलोर्लेपः!
गु ग्गु लो र्ले पः!
र् (repha) + ल + े (e-matra) + पः!
OH WOW! Look at ले:
A 'ल' with an 'े' stroke on top, and a repha 'र्' on top!
And the next letter is पः!
तच्छान्त्यै गुग्गुलोर्लेपः ॥
"For its pacification, an application (lepa) of guggulu [combined with that substance] should be given!"
"तद्द्रव्ययुक्तो देयो वा तच्छान्त्यै गुग्गुलोर्लेपः ॥"
WOW, that makes 1000% sense! गुग्गुलोर्लेपः! Brilliant!

  • Now look at Line 24:
    वातादौ गुग्गुलोः कुर्यात्तैलव्यापि चिकित्सितम् ॥ १४ ॥
    Wait, is it कुर्यात्तैलव्यापि?
    Let's read:
    `वातादौ गुग्