हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)
Hastyayurveda Gajashastra of Palakapya Muni with Commentary
पालकाप्य मुनि (सम्पादक: पं. शिवदत्त शर्मा) द्वारा
DevanagariHindipublished742 पृष्ठ
पृष्ठ 494, कुल 742 में से
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मूलश्च कण्डूमांश्चैव यो भवेत् ॥ Wait,महापर्यन्तमूलश्च! Look at महापर्यन्तमूलश्च: म ह ा प र् य न् त म ू ल श् च`
Line 28:
समस्तैर्लक्षणैरेभिर्वातपित्तकफात्मकैः ।
स म स् तै र् ल क्ष णै रे भि र् व ा त पि त् त क फ ा त् म कै ः ।
Line 29:
संनिपातात्मकं विद्याद्व्रणं व्रणविभागवित् ॥
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Line 31: Footnote:
१ ख. निर्विशेषेण । २ क. ॰गतः ॥ अ° ।
Wait, before १ ख. is there a symbol?
Look at the start of footnote line:
There is a small circle or degree sign or avagraha?
It looks like: `१ ख. निर्विशेषेण । २ क. ॰गतः ॥ अ