हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)

हस्त्यायुर्वेद: गजशास्त्र (पालकाप्य मुनि - सम्पूर्ण गज-चिकित्सा, शरीर-रचना एवं मत्त-गज प्रबन्धन)
Hastyayurveda Gajashastra of Palakapya Muni with Commentary
पालकाप्य मुनि (सम्पादक: पं. शिवदत्त शर्मा) द्वारा
DevanagariHindipublished742 पृष्ठ
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हस्त्यायुर्वेदाध्यायविषयानुक्रमः—
[स्तम्भ १]
| विषयाः | अ० |
|---|---|
| म्, आगन्तुकरोगाणां नामसंख्याकथनं | |
| ऽप्रमष्टयङ्ककथनं साध्यासाध्यकृच्छ्रसाध्यरो- | |
| गाणां नामकथनं, च ... ... ... | ७ |
| ज्वरोत्पत्तिकथनम्, प्रसङ्गाद्देवदानवयो- | |
| र्युद्धकथनम्, देवानां स्वरक्षणार्थं शिवविष्णू | |
| प्रति गमनवर्णनम्, शिवविष्णुसृष्टज्वर- | |
| प्रज्वरपीडितदानवानां स्वरक्षणार्थं ब्रह्माणं | |
| प्रति गमनं स्वस्य ज्वरप्रज्वरपीडाविमुक्ति- | |
| प्रार्थना च। प्रसङ्गाज्ज्वरप्रज्वरयोः स्वरू- | |
| पवर्णनम्, ब्रह्मकृतदैत्यविज्वरत्वकथनं मृत्यु- | |
| लोकं प्रति ज्वरप्रज्वरयोः प्रेषणं च। ज्वर- | |
| प्रज्वरपूर्वरूपलक्षणकथनम्... ... ... | ८ |
| ज्वरस्य नरहयखरादिस्थानविशेषभेदेन | |
| ज्वूराभितापखारेकादिनामाविशेषकथनम्, ग- | |
| जस्थितज्वरस्य पाकल इतिनामतद्वयव- | |
| र्थकथनं मनुष्यभिन्नासह्यत्वकथनं च। ज्वरस्य | |
| मनुष्यसह्यत्वगजासह्यत्वयोर्हेतुकथनम्, पाक- | |
| लस्य शुद्धबालादिदशभेदकथनम्, शुद्धबा- | |
| लादिदशविधपाकलस्य प्रत्येकमपत्तिहेतुलक्ष- | |
| णकार्यपरिहारादिकथनम् ... ... ... | ९ |
| स्कन्दरोगस्य शोषिणमितिनामन्तरान्व- | |
| र्थत्वान्तरायामादिभेदत्रयकथनम्, अन्तरा- | |
| यामस्कन्दस्योत्पत्तिनिदानचिकित्सितकृच्छ्र- | |
| साध्यत्वकथनम्, बहिरायामव्याविद्धस्कन्द- | |
| योरुत्पत्तिनिदानासाध्यत्वकथनम् ... ... | १० |
| पुराणकृशरोगस्य पाण्डुरोगइतिनामन्त- | |
| रकथनं वातपित्तकफसंभवास्त्रैविध्यकथनं च। | |
| पित्तजपुराणकृशनामान्तरपाण्डुरोगस्योत्पत्ति- | |
| निदानचिकित्सितकथनम्, कफजकर्तुरिसरि- | |
| नामान्तरपाण्डुरोगस्योत्पत्तिनिदानचिकित्सि- | |
| तकथनं वातजप्लीहोदरनामान्तरपाण्डुरोग- | |
| स्योत्पत्तिनिदानचिकित्सितकथनं च ... | ११ |
| आनाहरोगस्यात्याशितादिभेदपञ्चककथ- | |
| नम्, अत्याशितस्योत्पत्तिनिदानचिकित्सा- | |
| दिकथनं शुद्धासंसक्तभेदद्वयवातोन्मथिताना- | |
| हस्योत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं तृतीयसं- | |
| सक्तवातोन्मथितानाहस्योत्पत्तिनिदानासाध्य- | |
| त्वकथनं च, धान्यानाहस्य प्रदुष्टाप्रदुष्टभे- | |
| दद्वयकथनपूर्वकमुत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं |
[स्तम्भ २]
| विषयाः | अ० |
|---|---|
| प्रदुष्टानाहस्य दुश्चिकित्स्यतमत्वकथनं च। | |
| मृत्तिकाजगधानाहस्योत्पत्तिनिदानचिकित्सा- | |
| कथनं संनिपातानाहस्योत्पत्तिनिदानासाध्य- | |
| त्वकथनं च... ... ... ... | १२ |
| मूर्छाया द्वादशभेदकथनम्, अतिभोजन- | |
| मूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं विदग्धभो- | |
| जनमूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं धान्य- | |
| मूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं स्नेहमूर्छो- | |
| त्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं वातमूर्छोत्पत्ति- | |
| निदानचिकित्साकथनं पित्तमूर्छोत्पत्तिनिदान- | |
| चिकित्साकथनं श्लेष्ममूर्छोत्पत्तिनिदानचि- | |
| कित्साकथनं संनिपातमूर्छोत्पत्तिनिदानचिकि- | |
| त्साकथनं वारिमूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्सा- | |
| कथनं मार्गमूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं | |
| मद्यमूर्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं यवसम्मू- | |
| र्छोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं च ... ... | १३ |
| वातपित्तादिासप्तविधशिरोरोगकथनम्, | |
| वातिकशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं | |
| पैत्तिकशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं, | |
| कफजशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं | |
| रक्तजशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकित्साकथनं | |
| संनिपातिकशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकित्सा- | |
| कथनं कृमिशिरोरोगोत्पत्तिनिदानचिकि- | |
| त्साकथनमभिघातजशिरोरोगोत्पत्तिनिदान- | |
| चिकित्साकथनं च... ... ... ... | १४ |
| त्रिंशत्पादरोगाणां नामकथनं वनस्थग- | |
| जानां पादरोगानुत्पत्तिहेतुकथनं ग्राम्यगजा- | |
| नां पादरोगोत्पत्तिहेतुकथनं च। पादरोगाणां | |
| शरीरसमुत्थागन्तुकभेदद्वयकथनं नवविधाग- | |
| न्तुकपादरोगाणां नामकथनं त्रिंशत्पादरो- | |
| गाणां प्रत्येकमपत्तिनिदानचिकित्साकथनं | |
| साध्यासाध्यकृच्छ्रसाध्ययाप्यपादरोगाणां ना- | |
| मकथनं क्षारकर्मविधिकथनमनिकर्मविधिक- | |
| थनं च ... ... ... ... | १५ |
| अष्टविधव्यापद्रोगकथनम्, तैलव्यापदुत्प- | |
| त्तिनिदानचिकित्साकथनं सर्पिर्व्यापदुत्पत्ति- | |
| निदानचिकित्साकथनं वसाव्यापदुत्पत्तिनिदा- | |
| नचिकित्साकथनं क्षीरव्यापदुत्पत्तिनिदान- | |
| चिकित्साकथनं मद्यव्यापदुत्पत्तिनिदानचिकि- |