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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 396

( ३६४ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने-
पीला रंगवाला, जलसे रहित, काला रंगवाला ऐसा पका हुआ आंव गिरे और
बस्तिस्थानमें शूल नहीं होवे और जो आमवात होवे तो श्रमग्लानि होती है ॥ १५ ॥ और
जो आमपाकी वात होवे तो उसका पाचन नहीं करे जुलाब भी नहीं देवे वहां स्तंभन औष-
धोंको करे ॥ १६ ॥ कटि, पीठ, छाती इनमें व्यथा हो, बस्तिमें शूल हो, गुल्मसरीखा पेट
गर्जे, शोजा हो ॥ १७ ॥ शिर भारी हो, बहुतसा आम गिरे वह सर्वांगवात जानना ॥ १८॥
उसको पहले पाचन औषध देवे पीछे जुलाब देवे, और विष्टंभी, गुल्मपाकी, सर्वांग ॥१९॥
ये रोग साध्य हैं और स्नेही आम, आम ये दो कष्टसाध्य कहे हैं ॥ २० ॥ वहां पके हुए आमको
सुखसाध्य जानके उसका कर्म करे ॥ २१ ॥
अथ पाचनविधि।
रास्ना त्रिकण्टमेरण्डं शतपुष्पा पुनर्नवा॥ पानं पाचनके शस्तं
वामे वाते भिषग्वर॥२२॥ रास्ना श्योनाककाश्मीरं चिकणीकं
च पुष्करम् ॥ क्वाथं शृतं सुखोष्णं च पाचनं पाययेन्नरः॥ एत-
त्पाचनकं विद्धि प्रोक्तं चामे सवातिके ॥ २३ ॥
हे उत्तम वैद्य! आमवातमें रास्ना, गोक्षुर, अरंड, सौंफ, सांठी इनका क्वाथ बना पीनेमें पाचनके
वास्ते श्रेष्ठ है ॥ २२ ॥ रास्ना, सोनापाठा, खंभारी, चिकनीसुपारी, पोहकरमूल इनका क्वाथ
सुखसे सुहाता हुआ गरम २ पीना पाचनमें हित है। यह क्वाथ आमवातमें पाचनके वास्ते
श्रेष्ठ है ॥ २३ ॥
आमवाते कणायुक्तं दशमूलीजलं पिबेत्॥गुडूची नागरं पथ्या
चूर्णमेतद्गुडान्वितम् ॥२४॥ धान्यनागरराजाम्लदेवदारुवचा-
भयाः ॥ पाचनं चामवाते च श्रेष्ठमेतत्सुखावहम्॥२५॥ तथा
कोलकचूर्णं वा पिबेदुष्णेन वारिणा ॥ आमवातञ्च मन्दाग्निं
शूलं गुल्मञ्च नाशयेत्॥ २६ ॥बलाक्वाथाढकं क्षित्वा दधित-
क्वाढकं क्षिपेत् ॥कुलत्थाढकयूषं तु सौवीरस्याढकं तथा॥२७॥
एकत्र कृत्वा विपचेद्योजयेदौषधञ्च तत् ॥ शतपुष्पा देवदारु
पिप्पली गजपिप्पली ॥२८॥त्रिसुगन्धि मुरामांसी कुष्ठं द्विप-
श्चमूलकम्॥चूर्णं विनिक्षिपेत्तत्र सिद्धं तद्वतारयेत्॥२९॥पाने
चाभ्यन्तरे योज्यं निरूहे बस्तिकर्मणि॥ हन्ति वातामयं सर्वं
श्रेष्ठं गुणगणप्रदम् ॥ ३० ॥ पिबेदेरण्डजं तैलं गुडक्षीरेण संयु-