हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ७५
किन्न^१ निरोध क्रोध करि बुल्लिव ।
देखो कुबुधि हमीर सु मुझिव ॥ ४१८ ॥
जब हमीर हर मंदिर आए ।
बहु बिधि पूजि सु बचन सुनाए ॥
धूप दीप आरती उतारी ।
संकर की अस्तुति उच्चारी ॥ ४१९ ॥
नाराच छंद
नमामि ईस संकरं, जटी पिनाकयं हरं ।
सिवं त्रिसूल^२ पाणियं, बिभुं प्रसुं सुजाणियं ॥ ४२० ॥
त्रिनैन अगि^३ भालयं, गलै^४ सु मुंडमालयं ।
भवानि^५ बाम भागयं, ललाट चंद्र लागयं ॥ ४२१ ॥
धरैं^६ सु सीस गंगयं, कपूर गौर अंगयं ।
सुवंग^७ संग फुंकरैं, सु नीलकंठ हुँकरैं ॥ ४२२ ॥
गणं गणेस सांबुयं, कि बीरभद्र जांबुयं ।
प्रसीद नाथ बेगयं, करो कृपा सु मे जयं ॥ ४२३ ॥
सहाय नाथ किज्जिए, अभै सुदाँन दिज्जिए ।
अलावदोन आययं, मलेच्छ^८ संग ल्याययं ॥ ४२४ ॥
सुलक्ख बीस सातयं, चढ़े सु कुप्पि^९ गातयं ।
प्रताप तेज आपकैं, मिटे कुकर्म्म पाप कै ॥ ४२५ ॥
सरन्न सेख आययं, करो सहाय पाययं ।
उमा सु नाथ नाथयं, गहो सु मोर हाथयं ।
छुटंत लाज गड्डयं, सरन्नगन्न द्रड्ढय^१० ॥ ४२६ ॥
१ कीन । २ त्रिलोक । ३ अग्नि । ४ गरै । ५ भवा सुबाम
भागयं । ६ टरैं । ७ भवंग । ८ मलेच्छ बंस भाइयं । ९ कोपि ।
१० दिड्डयं ।