हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ | हम्मीररासो
तिहूँ काल हेरै लखै नाहिं भाँनं ॥१९९॥
रमै कोकिला कीर नच्चै मयूरं ।
कहैं बैन मानो बजै कामँतूरं ॥
बहै सीत मन्दं सुगंधं पवन्नं ।
करै काम उद्दीपनं देखि बन्नं ॥२००॥
सुरं^१ सुंदरं पंकजं बन्न फुल्ले ।
करैं गुंज भारी भ्रमै भ्रमर मुल्ले ॥
चहूँ ओर कुमोदनी चारु फुल्ली^२ ।
महा मोद सौं भार आनंद झुल्ली ॥२०१॥
किते जीव संमूह देखंत भज्जैं ।
मृगं व्याघ्र चीते रिछं जत्र गज्जैं^३ ॥
कहूँ कौलपुंजं कहूँ लीलगाहं ।
कहूँ चीतलं पांडुलं^४ ब्याघ्र नाहं ॥२०२॥
कहूं भिल्ल बंके^५ बसैं ताङस्थाँनं^६ ।
भखैं सिंह स्यार ससाझोन पाँनं ॥
करै सिंह गुंजार भारी भयाँनं ।
सुने प्राँनहारी डरैं जीव हाँनं ॥२०३॥
तहाँ साह की सेन किन्हौं प्रबेसं ।
तजे खाँन^७ पाँनं लए जो असेसं ॥
करैं बीर जेते सु केते उपावं ।
हनैं जीव जे साहि को बाज^८ पावं^९ ॥२०४॥
तहाँ साह कै यूँ भए जाय डेरा ।
चहूँ ओर को खाँन केते अनेरा ॥
पाद-टिप्पणी:
१ सरं सुन्दरं पंकजं पुंज । २ फूली । ३ मृगं भार चीते वृकंजत्र
गज्जैं । ४ पाडलं । ५ भील बाँके । ६ तास स्थानं । ७ जाँन । ८ बाच ।
९ उपायं, जपायं (अंत्यानुप्रास) ।
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