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सर्वकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 257

:
म - रो - मृ - गाः
Look at the characters:
म (ma)
रो (ro)
मृ (mṛ) - 'म' with 'ऋ' matra!
गाः (gāḥ) - 'ग' with 'आ' matra and visarga!
Yes, "मरोमृगाः" (maromṛgāḥ)!
Amarakosha says: "रोहिताश्चमरो मृगाः" !
So in L31: "रोहिताश्चमरोमृगाः" इति ।
Not 'ष्ट्राः'! It is definitely "रोहिताश्चमरोमृगाः" इति ।!

Now check L31 continued:
तत्र एणश्चारुनेत्र इत्येवं जातिभेदख्यापकन्तद्व्याख्यानञ्चा-
मरविवेके महेश्वरेण कृतम् ॥
Wait, let's read carefully:
"तत्र एणश्चारुनेत्र इत्येवं जातिभेदख्यापकन्तद्व्याख्यानञ्चा-"
मरविवेके महेश्वरेण कृतम् ॥
Wait: जातिभेदख्यापकन्तद्व्याख्यानञ्चा-
मरविवेके महेश्वरेण कृतम् ॥
Let's check every character:
त (ta) त्र (tra)
ए (e) ण (ṇa) श्चा (ścā) रु (ru) ने (ne) त्र (tra)
इ (i) त्ये (tye) वं (va