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सर्वकोश
गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)

Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary

महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 332 में से

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पृष्ठ 178

शक्यत्वात्" or "परिहर्तुमशक्यत्वात्"?
Look at 'र्त्तु' in 'कर्त्तृक' (L13): exactly the same ligature!
So: "परिहर्त्तुमशक्यत्वात्".

Line 18:
"त्वादिति । एवञ्च सकलमैथिलाचारोऽपि सङ्गच्छते । पद्धतिरप्येवं लिखित-"

Line 19:
"( गृ० सं० ) वाक्यं विशेषविषयबोधितपरमतो न विरोधइतिमुरारिमिश्राःप्राहुः ।"
Wait, is it "( गृ० सं० )" or "(गृ०सं०)"?
There is a space: "( गृ० सं० )".
And "विरोधइतिमुरारिमिश्राःप्राहुः ।" - no spaces between विरोध, इति, मुरारिमिश्राः, प्राहुः. Wait, look at "विरोधइतिमुरारिमिश्राःप्राहुः":
"विरोधइति" is joined, "मुरारिमिश्राः" is joined, "प्राहुः" is joined.

Line 20:
"मन्त्रोयथा—"इयं नार्युपब्रूतेऽग्नौ लाजानावपन्ती ।"

Line 21:
"दीर्घायुरस्तु मे पतिः शतं वर्षाणि जीवत्वेधन्तां ज्ञातयोमम स्वाहा" ॥२॥ इति ॥"
Wait, look at "