सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 419, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 419

४१३ उत्तरकाण्ड
राम-हिडोला
राग मलार
[ १८ ]
आली री ! राधोके रुचिर हिंडोलना झूलन जैए ॥
फटिक-भीति सुधारु चहुँ दिसि, मंजु मनिमय पौरि ।
गच काँच लखि मन नाच सिखिनु, पाँचसर-सुफँसौरि ॥
तोरन-बितान-पताक-चामर-धुज-सुमन-फल-थोरि ।
प्रतिछांह-छबि कहि-साखिदै प्रति सों कहै गुरु हौं रि ॥ १ ॥
मदन-झयके खंभ-से रचे खंभ सरल बिसाल ।
पाटीर-पाटि विचित्र भँवरा बलित, बेलत लाल ॥
डांड़ो कनक कुंकुम-तिलक-रेख-सी मनसिज-माल ।
पटली पदिक रति-हृदय जनु कलधौत कोमल माल ॥ २ ॥
उनये सघन घनघोर, मृदु झरि सुखद सावन लाग ।
बगपांति, सुरधनु, दमक दामिनि हरित भूमि-बिभाग ॥
दांदुर मुदित, भरे, सरित-सर, महि उमग जनु अनुराग ।
पिक-मोर-मधुप-चकोर-चातक-सोर उपबन बाग ॥ ३ ॥
सो समौ देखि सुहावनो नवसत सँवारि सँवारि ।
गुन-रूप-जोबन-सींव सुंदरि चली झुंडनि भारि ॥
हिंडोल-साल बिलोकि सब अंचल पसारि पसारि ।
लागीं असीसन राम-सीतहि सुख-समाजु निहारि ॥ ४ ॥
झूलहिं, झुलावहिं, ओसरिन्ह गावैं सुहो, गौडमल्लार ।
मंजीर-नूपुर-बलय-धुनि जनु काम-करतल-तार ॥
अति मुचत स्रमकन मुखनि, बिथुरे चिकुर, बिलुलित हार ।
तम तड़ित उड़ुगन अरुन बिधु जनु करत ब्योम-बिहार ॥ ५ ॥