गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५१ सुन्दरकाण्ड
सेन साजि कपि-भालु का-सम कौतुक ही पाथोधि बँधैहैं ।
घेरोइपै देखिबो लंकगढ़, बिकल जातुधानी पछितैहैं ॥२॥
निसिचर-सलभ कृसानु राम सर उड़ि-उड़ि परत जरत जड़ जैहैं।
रावन करि परिवार अगमनो, जमपुर जात बहुत सकुचैहैं ॥३॥
तिलक सारि, अपनाय बिभीषन, अभय-बाँह दै अमर बसैहैं।
जय धुनि मुनि, बरसिहैं सुमनसुर, ब्योम बिमान निसान बजैहैं ॥४॥
बंधु समेत प्रानबल्लभ पद परसि सकल परिताप नसैहैं।
राम-बामदिसि देखि तुमहि सब नयनवंत लोचन-फल पैहैं ॥५॥
तुम अति हित चितइहौ नाथ-तनु, बार बार प्रभु तुमहि चितैहैं।
यह सोभा, सुख-समय बिलोकत काहू तो पलकैं नहि लैहैं ॥६॥
कपिकुल-लखन-सुयस-जय जानकिसहित कुसल निज नगर सिधैहैं।
प्रेम पुलकि आनंद मुदित मन तुलसिदास कल कीरति गैहैं ॥७॥
[त्रिजटा बोली-] 'सीते ! धैर्य धारण करो, अब पवनपुत्रसे
तुम्हारी सुधि पाकर रघुनाथजी जल्दी ही आवेंगे। वे स्वभावसे ही
कृपालु हैं, इसलिये देरी नहीं करेंगे ॥ १ ॥ वे कालके समान
वानर और भालुओंकी सेना सजाकर खेलसे ही समुद्रको बाँध लेंगे।
अब तुम लंकाको घिरी ही हुई देखोगी, और राक्षसियाँ व्याकुल
होकर पछतायेंगी॥ २॥ राक्षसरूपजड़ पतंगेउड़-उड़करभगवान् रामके
बाणरूप अग्निमें गिरकर जलते जायेंगे, तथा रावण अपने परिवारको
आगे कर यमलोकको जाते हुए बहुत सकुचावेगा ॥ ३ ॥ भगवान्
विभीषणको अपनाकर उसे राजतिलक करेंगे और देवताओंको
अभयबाहु देकर देवलोकमें बसायेंगे । उस समय मुनिजन जयध्वनि
करेंगे, देवता लोग फूल बरसायेंगे और आकाशमें विमानोंपर चढ़कर
बाजे बजायेंगे ॥४॥ तथा भाइयोंसहित अपने प्राण-प्रिय रघुनाथजीके