गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)

गीतगोविन्दम् (महाकवि जयदेव - सम्पूर्ण १२ सर्ग व २४ अष्टपदी सटीक)
Gita Govinda of Jayadeva with Hindi Commentary
महाकवि जयदेव / पं. रामचन्द्र मिश्र द्वारा
DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ
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प्रथमः सर्गः—सामोद-दामोदरः ३७
दिनमणि-मण्डल-मण्डन! भवखण्डन!
मुनिजन-मानस-हंस!
जय जय देव हरे ॥२॥
कालिय-विषधर-गञ्जन! जनरञ्जन!
यदुकुल-नलिन-दिनेश!
जय जय देव हरे ॥३॥
मधु-मुर-नरक-विनाशन! गरुडासन!
सुरकुल-केलि-निदान!
जय जय देव हरे ॥४॥
अमल-कमल-दललोचन! भव मोचन।
त्रिभुवन भवन-निधान!
जय जय देव हरे ॥५॥
जनक-सुता-कृत-भूषण! जितदूषण!
समर-शमित-दशकण्ठ!
जय जय देव हरे ॥६॥
अभिनव-जलधर-सुन्दर! धृतमन्दर!
श्रीमुखचन्द्र-चकोर!
जय जय देव हरे ॥७॥
तव चरणे प्रणता वयम् इति भावय।
कुरु कुशलं प्रणतेषु,
जय जय देव हरे ॥८॥
श्रीजयदेवकवेरिदं कुरुते मुदम्।
मङ्गलमुज्ज्वलगीतम्
जय जय देव हरे ॥९॥
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