घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंघट रामायण / ९७
इंद्रियों के बास
१. अपान का बास—नाभी में है।
२. प्रान का बास—मान सरोवर तट वार है।
३. समान का बास—कलेजे में है।
४. उदान का बास—कंठ में है।
५. व्यान का बास—सब शरीर में है।
॥ सोरठा ॥
इंद्री अर्थ बिचार, नाम भेद सब भाखिया।
ठीका ठौर निहार, यह पुकार तुलसी कहा॥
अर्थ–इन्द्रियों के अर्थ पर विचार करते हुए उनके नाम और सभी भेदों का वर्णन कर दिया है।
उनके ठौर-ठिकाने को देखकर तुलसी ने यह सब पुकार कर बताया है॥
॥ सोरठा ॥
यह इंद्री का किया निषेदा। मन चीन्है सोई जाने भेदा॥
या की साखि सोत सब गाई। अब सुन्नन की कहौं लखाई॥
बाइस सुन्न सोध हम लीन्हा। ताकर भिन्न भिन्न कहूँ चीन्हा॥
अर्थ–यहाँ यह घट वर्णन इन्द्रियों का निषेध है–जिसने मन को पहचान लिया है, वही भेदों को भी
जानता है। इसकी साक्षी तथा उसके स्रोतों को मैंने गान किया। अब शून्य का वर्णन करता हूँ। मैंने शोध
करके बाईस सून्नों को समाया है और उनकी भिन्नताओं को मैंने भिन्न-भिन्न रूप में पहचाना है॥
॥ सुन्नन के नाम ॥
१. धुंधार सुन्न १२. नौखंड सुन्न
२. सब्दार '' १३. अलख ''
३. नौनार '' १४. पलक ''
४. अजसार '' १५. खलक ''
५. बिलंद '' १६. झलक ''
६. सुखनंद '' १७. सरवाट ''
७. अछरंद '' १८. दसघाट ''
८. सबसंध '' १९. खिरकाट ''
९. ब्रह्मांड '' २०. अजआठ ''
१०. सबअंड '' २१. सतलोक ''
११. भौभंड '' २२. परमोख ''
॥ शून्यों के नाम ॥
१. धुंधार शून्य १२. नौखंड शून्य
२. सब्दार '' १३. अलख ''
३. नौनार '' १४. पलक ''