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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 9

१६ / घट रामायण
'घट रामायण' की रचना, जैसा कि उन्होंने बताया है-संवत् १६१८ में की थी और पुनर्जन्म के बाद
उन्होंने उसे भी प्रगट किया। प्रगट भी नहीं किया, यह सन्तों के हाथ लग गई थी और उन्होंने इसे लोक
के सामने रखा-
घट रामायन सार जग विरोध गुप्तै करी।
लगी संत के हाथ बूझि भेद सारा लिया॥
इस कथा का सार इतना ही है कि 'घट रामायण' और 'तुलसी रामायण' की यदि तुलना की जाए
तो दोनों में 'घट रामायण' श्रीरामचरित मानस से अधिक श्रेष्ठ है। वह तो लोकांध जन समुदाय को
अंधी विधि से समझाने की एक कथा मात्र है किन्तु यह घट रामायण उससे भिन्न इस प्रकार है-
घट रामायन अगम पसारा। पिंड ब्रह्मांड लखा विधि सारा॥
नाम अनेक अनेकन कहिया। सो सब घट भीतर दरसइया॥
अगम निगम औ अकथ कहानी। तुलसी भाखी अगम निसानी॥
घट रामायन ग्रंथ बनाई। साखी सब्द अगम विधि गाई॥
(२) तुलसी शब्दावली१-'तुलसी साहब के इस ग्रंथ का नाम तुलसी 'शब्दावली' है-'सब्द' या
सबद निर्गुण पंथ का एक पारिभाषिक शब्द है। परम्परा में सन्तों एवं सत्गुरुओं द्वारा आध्यात्मिक
अनुभव एवं साधना के सन्दर्भ में जिन सत्यों का साक्षात्कार हुआ उनका कथन ही 'सब्द' है। ज्ञानदेव,
नामदेव, नानकदेव, कबीरदास, दादूदयाल आदि के 'सब्द' इसी संदर्भ के है। ये उनके आध्यात्मिक
अनुभव के 'शब्द' हैं और सबद के रूप में उनके साहित्य के अन्तर्गत संकलित है। तुलसी साहब की
'शब्दावली' का भी यही अर्थ है। ये उनके आध्यात्मिक अनुभव से सम्बन्ध विविध अनुभवों के संकलन
या उनके अपने निजी अनुभव के प्रमाण हैं। ये सबद अनेक छंदों तथा अनेक रागों में सन्तों की साधना
से जुड़े उनके विविध आध्यात्मिक पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विविध साहित्यिक छंदों यथा-दोहा,
सवैया, कुण्डलिया आदि, विविध काव्यकथा रूढ़ियों यथा ककहरा, बारहमासा, संवाद, मंगल एवं
विविध राग रागिनियों यथा-टप्पा, कलंग, धमार, तिल्लाना, ठुमरी, प्रभाती आदि-आदि रागों में गाई गई
हैं।
'शब्दावली' के मुख्य विषय निर्गुण मतवाद से सम्बद्ध है। विविध आडम्बरों का विरोध सर्वत्र
दृष्टिगत है। विविध प्रकार के कर्मों के आडम्बर के बीच फँसे हुए मानव समाज को सहज, नैतिक एवं
आडम्बर विहीन मार्ग दर्शन हो इस कृति का यही मुख्य लक्ष्य है।
शब्दावली का सबसे प्रिय विषय है-आध्यात्मिक रहस्यवाद और कबीर आदि की परम्परा में तुलसी
साहब भी उस अगम्य प्रियतम के लिए आत्मा की पीड़ा भरी वेदना को निरन्तर व्यक्त करते हुए केवल
मिलने की कामना ही नहीं करते उसके तादत्म्य से मिले सुख का अपने विशिष्ट अनुभव के साथ व्यक्त
करते हैं-
सतगुरु विरहिन बात कलेजे रोवै और चिल्लाइ।
हाय हाय हिये में निसि वासर हरदम पीर पिराइ॥
मैं दुखिया हौं दर्द दिवानी प्रीतम दस लखाई।
तुलसी प्यास बुझै प्यारे से चढ़ कर अधर समाई॥
किरपावंत संत समझावै और न लगै उपाई॥
१. प्रकाशित तुलसी साहब की शब्दावली भाग एक तथा दो बेलविडियर प्रिंटिंग वर्क्स, इलाहाबाद।