घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९२ / घट रामायण
१९. जैपाल ” ५२. सुचलेन ”
२०. अजया काल ” ५३. मजा गुनी ”
२१. केदारली ” ५४. तानी गंभीर ”
२२. रतनागिरि ” ५५. जगपती ”
२३. मेलमहंत ” ५६. गंधर्व सूत ”
२४. उदया ” ५७. रतनागिरि ”
२५. झकझेला ” ५८. सरोज मल ”
२६. उषमजार ” ५९. कुल कुम्भ ”
२७. मनउतगिरि ” ६०. पिगोभ ”
२८. सरपसोष ” ६१. गौड़ आसन ”
२९. जंभीर नागर ” ६२. पक्ष पती ”
३०. हंस मोह ” ६३. भाठ नाद ”
३१. बिराज ” ६४. गोहप माल ”
३२. ललित दया ” ६५. नरदया ”
३३. करुनामय ” ६६. इंद्र मनी ”
३४. बाष जार ” ६७. हंभीर ”
३५. जीव भूषन ” ६८. कहूक्तितोहल ”
३६. उदीत साह ” ६९. जंभीर नाद ”
३७. जगतधार ” ७०. द्याल पती ”
३८. साह पाल ” ७१. नेनौगार ”
३९. परन पोष ” ७२. काल मुनी ”
४०. नौनागर ” ७३. प्रेम मुनी ”
४१. ज्ञानपती ” ७४. हंस करनाग ”
४२. साधगिरि ” ७५. मल मोद ”
४३. नलदेव ” ७६. कूर नाकर ”
४४. सहस अपढ़ ” ७७. सुधन सरीष ”
४५. सुकृत जीव ” ७८. सुरति लोक ”
४६. ऊँच माया ” ७९. साध बाच ”
४७. सिंह नाद ” ८०. सुख बाच ”
४८. सहज तेज ” ८१. नेह नाच ”
४९. बेरंग नाद ” ८२. बस करन ”
५०. फूल काज ” ८३. भय मेटन ”
५१. केदार कोठ ” ८४. सुच भाव ”
॥ चौपाई ॥
चौरासी सिधि कथि बतलाई। सिधि इतने घट भीतर छाई॥
साधू कोइ करै परमाना। जिन घट के अंदर पहिचाना॥
अर्थ—चौरासी सिद्धों का कथन करके बतला दिया, यही इतने ही सिद्ध घट के भीतर स्थित
(छाये) हैं। जिन्होंने घट के अन्दर पहचान कर ली है, ऐसा ही कोई साधु ही उनका प्रमाण देगा॥