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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 80

घट रामायण / ८७
सताइस कोठा सुताचल नाऊँ। मन अलीप बैठे तेहि ठाऊँ॥
अठाइस कोठा धरनीधर नाऊँ। माया मोह बसै तेहि ठाऊँ॥
उंतिस कोठा कमची नाऊँ। बादल मेघ उठै तेहि ठाऊँ॥
तिसवाँ कोठा निरमल नामूँ। साहिब पलँग बिछा तेहि ठामूँ॥
इकतिस कोठा करोमल नामूँ। नवो नाथ बसते तेहि ठामूँ॥
बत्तिस कोठा बनासुर नामा। नौ कुत्ते बैठे तेहि ठामा॥
तेंतिस कोठा अनधू नामूँ। जम का तेज बसै तेहि ठामूँ॥
चौंतिस कोठा जमाउत नामा। जमुना नदी बसै तेहि ठामा॥
पैंतिस कोठा सकरदू१ सेता। कामदेव जहँ झरि झरि बहता॥
छत्तिस कोठा गनक नामूँ। क्रोध कलेस बसै तेहि ठामूँ॥
सैंतिस कोठा अवर धुर धुंधा। बैठ कृष्न जहँ डारै फंदा॥
अरतिस कोठा बँसबल नाऊँ। चौधा कामिनि हैं तेहि ठाऊँ॥
उन्तालिस करियाधर नाऊँ। बैठे दया धरम तेहि ठाऊँ॥
चालिस कोठा किरिकोता नामूँ। सात समुद्र बसै तेहि ठामूँ॥
इकतालीस भौरादे नामा। नवौ कुली नाग तेहि ठामा॥
बयालिस कुम्भेसुर नाऊँ। बारह कुम्भ बसैं तेहि ठाऊँ॥
तेंतालिस भगताधर नावाँ। भय और त्रास बसै तेहि ठावाँ॥
चवालिस कुसमाधर नाऊँ। चारों बेद बसै तेहि ठाऊँ॥
पैंतालिस मायारट नाऊँ। रोग अरु दोष बसै तेहि ठाऊँ॥
छेयालीस मलया गिरि नावाँ। हंस बिहंग बसै तेहि ठावाँ॥
सैंतालीस हलासुर२ नामा। तीरथ अरसठ हैं तेहि ठामा॥
अरतालिस कुकरंदर न्यारा। जहँ है सत्त सुकृत३ का द्वारा॥
कोठा उंचास मरमो नाऊँ। पवन अकास उठै तेहि ठाऊँ॥
कोठा पचास घूघर नामूँ। हरि को तेज बसै तेहि ठामूँ॥
कोठा इक्यावन मजकुर नामा। सहस कँवल फूला तेहि ठामा॥
बावन कोठा जरादे नामूँ। अगिनी जरै ऊँच तेहि ठामूँ॥
त्रेपन कोठा तेराधर नामूँ। धीर गंभीर बसै तेहि ठामूँ॥
चौवन कोठा सिसंधर नावाँ। सत संतोष बसै तेहि ठावाँ॥
१ एक लिपि में 'सरंदू' नाम लिखा है।
२. एक लिपि में 'कोलाहर' नाम दिया है।
३. मुं० दे० प्र० की पुस्तक 'सुकृत' की जगह "मुक्त" है।