सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 150 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

८४ / घट रामायण
कहँ लगि घट का कहौं पसारा। घट में अनेक बिधान सँवारा॥
जो सब घट कहि बरनि सुनाई। जौ जग कागद मिलै न स्याही॥
अर्थ-अब ब्रह्मांड का वृत्तान्त सुनिये। इस पिंड (घट) के बीच करोड़ों प्रलय देखा है। अपने पिंड
के भीतर जो एक विशिष्ट गुफा है, उसने जीव को उन कोटि प्रलयों से बचा लिया है॥
हे भाई! शब्द (निरंकार) निरन्तर सत्य है। जीव जब वहाँ पहुँचता है तो वह उसको ग्रहण कर लेता
है (उसकी रक्षा करने लगता है)। इस घट का मंथन सुरति समाधि से साधो-सुरति से शब्द (निरंकार)
को साधने वालों को काल कभी भी नहीं बाँध पाता॥
ब्रह्माण्ड के बीच कोटि-कोटि सूर्य हैं। इन कोटि-कोटि सूर्यों को देखकर सभी स्थिर हो जाते हैं।
घट का विचार घट के मध्य ही किया जा सकता है, बाहर नहीं-जिसके अन्दर ब्रह्मा, विष्णु आदि रहा
करते हैं॥
शिवशंकर तो इस घट के फंदे हैं। इस घट के अन्दर ९० नदियाँ ( १८ × ५ = ९० = एक गंडा
पाँच के बराबर होता है) हैं। इस घट में मैंने सात समुद्रों को देखा है, जिनका जल शून्याकाश के बीच
पहुँचता है॥
इस घट में तीर्थ एवं व्रत के स्थान हैं और इसी घट में मैंने मुरारी कृष्ण को भी देखा है। इसी घट
के अन्तर्गत समस्त योद्धागण एवं सामन्तगण हैं-लोक में दिखाई पड़ने वाले राजा प्रजा सभी घट में
हैं॥५॥
इसी घट में हिन्दू-तुर्क (मुसलमान) दो जातियाँ हैं-इस घट में सम्पूर्ण कर्मों की पंक्तियाँ
(स्थितियाँ) हैं। इसी घट में ही नियम, दया एवं धर्म हैं। इसी घट के अन्तर्गत पाप-पुण्य से संयुक्त
समस्त कर्म हैं॥
इस घट के दो भाई है-एक दण्ड है और दूसरा बंधन है। इसलिए जो कुछ बाहर है, वही यहाँ भी
है। इसी घट में ही लोगों के सारे निवास हैं, और इसी घट में नवयुवतियाँ होली खेलती हैं॥
इसी घट के अन्तर्गत छः दलों का पलास फूला हुआ है-इसी घट में ही लोग प्रजा को झकझोरते
रहते हैं। इसी घट में स्वर्ग तथा नरक दोनों हैं और इसी घट में जन्म और जन्म के बाद पुनः मरण होता
है॥
इसी घट के अन्दर ही साधु जन कथा-पुराण सुनाते हैं और इसी घट में ही माया नाना प्रकार के
कर्मों को कराती रहती है। घट में ही चोरी करने वाले अनन्त चोर हैं। इसी घट में ही संसार का
रचनाकर्त्ता सृजनहार ईश्वर भी है॥
इसी घट में राजा राज्य करता है, इसी घट में चौकी और पहरा भी है? इसी घट में ही सारे न्याय
चुकाए जाते हैं इसी घट में ही राग रागिनियों का ज्ञाता (रागी) नाना प्रकार की संगीत की ताने सुनाता
रहता है॥
सम्पूर्ण नाच-कूद इसी घट में है-इसी घट में ही राग तथा आलाप सुनाई पड़ता है। इसी घट में साहु
तथा महाजन रहते हैं और इसी घट में ही वह शून्य शब्द भी है॥
इसी घट में राजा बलि और वामनावतार भी हैं, इसी घट में सीता, रावण तथा राम है। इसी घट में
वह घट लंका भी है, इसी घट में ९६ प्रकार के मेघ छाये रहते हैं॥
इसी घट में पाँचों प्रकार के नाद स्थित हैं और इसी घट में ही सहज समाधि लगी रहती है। इसे घट
में चारों वेद रह रहे हैं और इसी घट में असंख्य ब्रह्म समाविष्ट हैं॥
घट में ही सन्तों का स्वर्ग तथा पाताल हैं, इसी घट में भयंकर काल बैठा हुआ है-जो सब बाहर है,
वही सब अन्दर भी है-घट का भेद घट के ही अन्दर है॥
इसी घट में सारे अड़सठ तीर्थ हैं और इसी घट में गंगा की धारा भी बहती है। इसी घट में ही लोग
स्नान करते हैं और इसी घट में ही तीनों लोक समाये रहते हैं॥