घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
पृष्ठ 74, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंघट रामायण / ८१
अर्थ—यह सब मैंने घट की यात्रा (सैल) वर्णन किया और मुझे पिंड में ही ब्रह्मांड दिखाई दिया।
आगे, घट के भेदों को बताऊँगा—मैं समझाकर कहता हूँ—अब उसे सुनो॥
चित्त की चेतना के द्वार पर तिल के समान छोटा कपाट लगा हुआ है। जीव का रास्ता वहाँ मकर
तार जैसा सूक्ष्म है। जिसने इतना भेद समझ लिया है—तुलसीदास कहते हैं, वही साधु है॥ २॥
आगे अपार अद्भुत ज्ञान है, अब इस पृथ्वी घट पर विचार कह रहा हूँ॥
॥ अर्थ घट का भेद और ठिकाना ॥
( सवाल )
१. पृथ्वी का माथा कहाँ है?
२. सुर का तेज कहाँ है?
३. चंद्र की जोति कहाँ है?
४. पानी का मूल कहाँ है?
५. कँवल का फूल कहाँ है?
६. वायु की नाभि कहाँ है?
७. गनेस की स्वाबी कहाँ है?
८. समुद्र का सोत कहाँ है?
९. आकाश का पोत कहाँ है?
१०. सुरति सहदानी कहाँ है?
११. जीव की बानी कहाँ है?
१२. जीव का नाम कहाँ है?
१३. सुरति का ठाम कहाँ है?
१४. ध्यान की सुरति कहाँ है?
१५. ज्ञान की मूरति कहाँ है?
१६. सुरति की निरति कहाँ है?
१७. सुमेर की जड़ कहाँ है?
१८. तिल भर हाड़ काया में कहाँ
है?
१९. गगन का कलेजा कहाँ है?
२०. मन का मुख कहाँ है?
२१ काम का आदि कहाँ है?
२२. देही का नूर कहाँ है?
२३. बदन का पिंजर कहाँ है?
२४. सिव का ध्यान कहाँ है?
२५. बेद का भेद कहाँ है?
२६. गुनी का गुन कहाँ है?
२७. राग का रस कहाँ है?
२८. सुर का आकार कहाँ है?
२९. आकार का आदि कहाँ है?
३०. अंत की समाधि कहाँ है?
३१. माया की धुनि कहाँ है?
३२. धुनि की सुन्न कहाँ है?
३३. सुन्न का शब्द कहाँ है?
३४. ज्ञान का मूल कहाँ है?
॥ जबाब ॥
१. पृथ्वी का माथा मैनागिरी पर्वत में है।
२. सूर का तेज उदयागिरि पर्वत पर हैं।
३. चंद्र का तेज चंदागिरि पर्वत पर हैं।
४. पानी का मूल निरंजन की दीपें में है।
५. कमल का फूल अछेद्दीप में है।
६. वायु की नाभि रंभा के पेड़ में हैं।
७. गणेश की स्वाबी मानसरोवर में है।
८. समुद्र का स्त्रोत समीवृक्ष में है।
९. आकाश का पोत वाराह के माथे पर है।
१०. सुरति सहदानी शब्द में हैं।
११. जीव (हंस) की बानी अष्ट कमल में है—
जीव अरूपी द्वादश कमल में है।
१२. जीव का नाम शून्य कमल में है।
१३. सुरति का स्थान दो दल वाले कमल में
है।
१४. ध्यान की सुरति गगन के ऊपर नयन
नासिका के अग्रवीच में हैं।
१५. ज्ञान की मूर्ति ब्रह्मांड कमल में है।