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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 148

घट रामायण / १५५
चौधा भुवन बाम्हन कहैं, तीनौ मत इक सार।
आदि पार कोइ ना कहै, लखा न रचनेहार ॥ २ ॥
अर्थ-जैन मत के अनुसार यह समझो कि गुणगान चौदह कहे जाते हैं। मुसलमान भी चौदह तबक
( योनियाँ ) बताते हैं। इसी प्रकार ब्राह्मणों के भी चौदह भुवन हैं।। १ ।।
ब्राह्मण भी चौदह भुवन कहते हैं-ये तीनों मत एक जैसे हैं, लेकिन इसके उस पार क्या है? इसके
विषय में कोई नहीं बताता। इस रचने वाले ईश्वर को किसी ने भी नहीं देखा है॥
॥ रेखता ॥
चौधा तबक किताब कुरान में।
पीर चौबीस पुनि वोहू गावा ॥ १ ॥
अल्ला रचि खेल सब जहान आलम किया।
आब और ताब पट अबर आवा ॥ २ ॥
सरा का खेल मुहम्मद से करि कहैं।
येही बिधि तुरक तकरीर लावा ॥ ३ ॥
जैन मत माहिं गुनष्टान चौधा कहैं।
बिधी भगवान चौबीस गावा ॥ ४ ॥
ऋषभजी रचन संसार की थापना॥
आपने मते की वोहू लावा ॥ ५ ॥
बेद पुरान संसार बाम्हन कहै॥
विधी भगवान चौबीस गावा ॥ ६ ॥
चतुरदस लोक लीला बरनन करैं।
रचना बैराट जग बिधि बनावा ॥ ७ ॥
झूठ और साँच कहौं कौन को कीजिये।
हिन्दू और तुरक पढ़ भूल पावा ॥ ८ ॥
जैन सोइ जिंद बुन्द आदि को ना लखा।
तीनि में किनहुँ नहिं चीन्ह पावा ॥ ९ ॥
दास तुलसी कहै अगम घर अधर है।
संत बिन भेद नहिं हाथ आवा ॥ १० ॥
अर्थ-पुस्तकों में चौदह तबकों ( योनियों ) का वर्णन है, और पीर उन्हीं चौबीसों का गान करते रहते
हैं॥ १॥
अल्ला मियाँ ने खेल खेल में रचकर सम्पूर्ण सृष्टि को सुशोभित कर दिया और उस पर जल तथा
चेतना अलग से भर दी॥ २ ॥
अपनी इस रचना के खेल को बनाकर मुहम्मद साहब से बताया और जो कुछ बताया है, उसको
मुसलमान तर्क और बहस के रूप में पेश कहते हैं॥ ३ ॥