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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 149

१५६ / घट रामायण
जैन धर्मी भी उसी को चौदह गुनष्ठान कहते हैं और भगवान की विधि की गणना चौबीस बताई
है॥ १४॥
संसार की स्थापना तथा रचना ऋषभ देव ने की और उन्होंने भी अपने मत के अनुसार उसे स्थापित
किया॥ ५॥
वेद, पुराण, संसार एवं ब्राह्मण सभी कहते हैं कि ब्रह्मा ने चौबीस रूपों का वर्णन किया है॥ ६॥
चौदह लोकों की ये सभी लीला वर्णन करते हैं और कहते हैं कि विधाता ने इस ब्रह्माण्ड को
बनाकर उसकी रचना की है॥ १७॥
सच और झूठ कहो किसको कहा जाए, हिन्दू तथा मुसलमान दोनों ने पढ़कर असत्य प्राप्त
किया ॥ ८॥
किसी जैन ने आज तक न जिंद को देखा न बुंद को और तुर्क, जैन एवं ब्राह्मण तीनों में से किसी ने
भी उसे नहीं पहचान पाया है॥ ९॥
तुलसी साहब कहते हैं कि उस अगम्य का निवास अन्तरात्मा में है, और संतों की मदद के बिना
यह रहस्य समझ में नहीं आता (हाथ में नहीं आता) ॥ १०॥
॥ चौपाई ॥
बाम्हन तुरुक जैन मत माईं। करता की गति केहु न पाई॥
मत अपने अपने की गावैं। तीनों करता तीनि बतावैं॥
थापा जग रुचि एक बनाई। ये तीनों मिलि तीनि बताई॥
अर्थ-हे सखे! ब्राह्मण, तुर्क एवं जैन ये तीनों मत कर्त्ता परमात्मा की गति किसी ने भी नहीं प्राप्त
की॥ सभी अपने-अपने मत का गान करते हैं-और तीनों तीन सृष्टि कर्त्ता बताते हैं। उस ईश्वर ने एक
ही संसार बनाकर उसकी स्थापना की है- और ये तीनों मिलकर तीन बताते हैं।
॥सोरठा ॥
धर्मा धर्म पसार, जैन बिधी कस कस कही।
भिनि भिनि कहौ बिचार, तब संजम उपवास बिधि ॥
अर्थ-हे धर्मा! जैन विधि से धर्म के प्रसार को किस-किस प्रकार कहा गया है, तुम भिन्न-भिन्न
ढंग से तप, संयम, उपवास की विधियों पर विचार करते हो (यह ठीक नहीं हैं)॥
॥ चौपाई ॥
व्रत संजम जप तप बतलावौ। कहै तुलसी भिनि बिधि दरसावौ ॥
कस कस चलन बात बिधि कहिये। स्त्रावग बिधि पुनि धर्म सुनइये ॥
स्त्रावग कौन बात बिधि पालैं। सोई कहौ कौन बिधि चालैं॥
धर्मा अष्टक बाँचि सुनाई। तुलसी सुनियौ चित्त लगाई ॥
अर्थ-तुम, व्रत, संयम, जप, तप आदि को बतलाते हो और तुलसी साहब कहते हैं, उन्हें भिन्न-
भिन्न ढंग से निरूपित करते हो। किस-किस प्रचलन की विधियों की बातें कहें-फिर उसके बाद
स्त्रावणों की विधि से धर्म को सुनाते हो ॥
स्त्रावक किस विधि से अपनी बातें सिद्ध करते हैं, वही बताओ, कि वे किस प्रकार का आचरण
करते हैं। धर्मा ने (इस बात को सुनकर) जैनाष्टक बाँच कर सुनाया और तुलसी साहब ने उसे चित्त
लगाकर सुना॥