घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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॥ दोहा ॥
तुलसी भूमि निरबान की, धर्मा सुनौ बयान।
केवलि ज्ञान गोंकार का, तुलसी करत बखान॥ १॥
फटिक सिला नभ ऊपरै, केवलि करत बखान।
तुलसी चढ़ि असमान पर, निरखा भिनि भिनि छान॥ २॥
निरबान निरखि आगे चली, सुनि अंड बाइस पार।
नहिं निरबान गति वहँ चलै, तुलसी देखा झार॥ ३॥
जीव अचर चर अंड के, जो ब्रह्मांड के माहिँ।
सूरति चढ़ि असमान पर, तुलसी देखा जाइ॥ ४॥
अर्थ-हे धर्मा! मेरी बात सुनो, निर्वाण की भूमि, वह केवल 'गोंकार' ज्ञानी भूमि है, ऐसा,
तुलसीदास कहते हैं॥ १॥
शून्याकाश के ऊपर स्फटिक शिला कैवल्य ज्ञान युक्त सन्तजन उसका वर्णन करते हैं। तुलसी
साहब कहते हैं कि मैंने भी शून्याकाश पर चढ़कर उन भिन्न-भिन्न केन्द्रों को देखा॥ २॥
निर्वाण पद को देखकर आत्मा के आगे चलने पर उसे बाइस ब्रह्मांड दिखाई पड़ते हैं। उन बाइस
अंडों के आगे निर्वाण की गति नहीं चलती-तुलसी ने इस साफ-साफ देखा है॥ ३॥
इस अंड के चराचर जीव जो ब्रह्मांड के मध्य हैं-तुलसी साहब कहते हैं कि शून्याकाश पर चढ़कर
मैंने उन्हें भी देखा है॥ ४॥
॥ चौपाई ॥
तुलसी धर्म बिलोके सारी। तुरक जैन बाम्हन मत झारी॥
जग थापन जैनी बतलावैं। ऋषभ देव कीन्हा बिधि गावैं॥
तीथंकर चौबीसों बानी। तुरक पीर चौबीस बखानी॥
मुहम्मद थापन कीन्ह जहाना। बाम्हन ब्रह्मा बेद बखाना॥
मुहम्मद तुरक बाम्हन बतलावैं। तीसर जैनी अस अस गावैं॥
अस अस तीनों कहत बखाना। झूठ साँच कहौ केहि को माना॥
अर्थ-तुलसी साहब कहते हैं कि तुर्क, जैन एवं ब्राह्मण धर्म से सम्बद्ध सारे मतों को मैंने देखा है,
जैसा कि जैन मतावलम्बी बतलाते हैं-'ऋषभदेव' ने इस संसार की स्थापना की है॥
चौबीस तीर्थंकरों की ये कहते हैं और तुर्क, पीर भी चौबीस की ही बातें करते हैं। मुसलमान कहते
हैं कि मुहम्मद साहब ने इस संसार की स्थापना की है और ब्राह्मण ब्रह्मा तथा वेद को बतलाते हैं॥
मुहम्मद साहब को तुर्क एवं ब्राह्मण ब्रह्मा को तथा तीसरे जैनी इस प्रकार की बातें करते हैं। इस
प्रकार से तीनों कहते हैं और बताइए-इनकों किस तर्क से झूठ या सच माना जाए॥
॥ दोहा ॥
गुनष्टान चौधा कहे, जैन मते में जान।
तुरक तबक चौधा कहे, बाम्हन भुवन बखान॥ १॥