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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 137

१४४ / घट रामायण
जब साधक को हाहूत ( स्वर्गलोक ) का होश हो तब वह लाहूत ( मृत्यु लोक ) परमात्मा से जाकर
मिल जाए। मंसूर साहब कहते हैं कि यदि अल्हा के आनन्द की लौ लगी है, तो निश्चित ही रब
( परमेश्वर ) उसे मिल जाएगा ॥ ॥४॥
॥ दोहा ॥
रब्ब राह लौ लाह में, खुदा खोज दिल माह।
रब खोदाइ से अलग है, खुद खुदाइ तेहि नावँ ॥ १ ॥
बूझौ खोज किताब में, सब कुरान कुल झार।
कर तलास काजी सुनौ, कहि मनसूर पुकार ॥ २ ॥
अर्थ-'रब' की ओर जाने वाले मार्ग पर लौ लगाकर दिल के अन्दर खुदा की खोज करो। यह रब
( परमात्मा ) खुदाई से अलग है और खुदा तो स्वयं उसे के अन्दर हैं ॥ १ ॥
मंसूर पुकार कर कहते हैं कि मेरी बात सुनो ईश्वर को पुस्तकों में खोजो खोजकर समझो, कुरान
में भी अच्छी तरह ठोंकपीट कर समझ लो उसके बाद उसकी इनसे अलग तलाश करो ॥ २ ॥
॥ सोरठा ॥
तुलसी तकी निहार, कहि पुकार मनसूर ने।
मुरसिद खोज बिचार, बन मुरीद मुरसिद मिलै ॥
अर्थ-तुलसी साहब तकी शेख को पुकार कर कहते हैं कि मन में अच्छी तरह देखो विचारपूर्वक
धर्मगुरु की खोज करो, मन के मुताबिक वह धर्मगुरु मिलेगा।
॥ चौपाई ॥
तुलसी कहै तकी सुन बाता। खुद खुदाइ मालिक है दाता ॥
उनका खोज खुदा नहिं पाया। नहिं कितेब लिखने में आया ॥
काजी मुल्ला खोज न पावै। दे दे बाँग खुदा गोहरावै ॥
अब खुदाइ का खोज बताओं। खुदा राह और भिस्त लखाओं ॥
अर्थ-तुलसी साहब कहते हैं कि हे तकी! मेरी बातें सुनो, खुदा स्वयं स्वामी और दाता दोनों हैं। उस
मूल खुदा की खोज खुदा भी करके नहीं प्राप्त कर सका है, और लिखी हुई धर्म की पुस्तकों में कहीं
भी पढ़ने में नहीं आया है॥ अब मैं आपको खुदा की खोज बताता हूँ और स्वयं आपको खुदा का मार्ग
तथा स्वर्ग को दिखाता हूँ।
॥ रेखता ॥
अजब अनार दो भिस्त के द्वार पै।
लखै दुरवेस फक्कीर प्यारा ॥ १ ॥
ऐन के अधर दोउ चस्म के बीच में।
खसम को खोज जहँ झलक तारा ॥ २ ॥
उसी बिच फकत खुद खुदा का तखत है।
सिस्त से देख जहँ भिस्त सारा ॥ ३ ॥