घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंघट रामायण / १४३
॥ पश्तो ४॥
देख कुछ नहिं इस जहाँ में, सब फना हो जायँगे (मयाँ)।
रहै रब का नाम मरदो, लोग लशकर कूँच है॥ १॥
चार दिन खूबी खलक में, अन्त मरना इक है (मयाँ)।
ज्यों धुएँ का मेघडम्बर, कुल मिटै इक पलक में॥ २॥
तन को देखो आशिको, बस खून चमड़ी हाड़ है।
जब निकल जाबै पवन, तब गांड़ मिट्टी में मियाँ ॥ ३॥
यार अजीजों ने कफन में, बाँध धरा ताबूत पर।
जोरू अम्मा कुल कुटम सब, मनसूर तन मन झूठ हैं (मयाँ) ॥ ४॥
अर्थ--हे तकी मियाँ? देखो इस जगत में कुछ भी स्थायी नहीं है और एक दिन सब कुछ गायब हो
जाएँगे। हे पुरुषों! केवल रब (परमेश्वर) का ही नाम बचेगा और यहाँ सारे मनुष्य और उनके समूह
कूच कर जाएँगे॥ १॥
इस संसार की खूबी केवल चार दिनों तक के लिए ही है, और अन्त में एकमात्र मृत्यु ही शेष है।
जैसे, धुएँ के बादल की घटाएँ एक ही पल में सारी की सारी नष्ट हो उठती हैं॥ २॥
हे प्रेमियों! इस शरीर की तरफ देखो, इसमें केवल इसमें खून है, चमड़ी और हड्डियाँ ही हैं और इस
शरीर से जब वायु निकल जाती है तो हे मियाँ! इसे मिट्टी में गाड़ देते हैं॥ ३॥
मंसूर कहते हैं कि हे यार अपने साथियों में फिर कफन में बाँधकर उसे ताबूत पर रखा और फिर
पत्नी, माँ, परिवार, कुटुम्ब, शरीर, मन आदि सभी झूठे हो उठते हैं॥ ४॥
॥ पश्तो ५ ॥
खोज मुरशिद रे मुरीदो, राह रोशन यार को (मयाँ)।
रूह मेहर मुरशिद के दस्तों, दिल फिजल दिलदार में॥ १॥
रूह चढ़ावौ रे अबर को, हो खबर उस यार को।
लावै जब रब राह चीन्है, फल में लखै इसरार को॥ २॥
कुफल खोले रे अधर के रूह से फोड़ असमान म्याँ।
जान मलकूत नासूत को, जबरूत की कर कदर म्याँ ॥ ३॥
जा मिलै लाहूत रे जब, होश हो हाहूत का।
लौ लगी जो ला के अन्दर, रब मिले मनसूर को॥ ४॥
अर्थ--हे मुरीदों (शिष्यों) मुरशिद (गुरु) की रोशनी भरी राह को खोजो। उस दिलदार की आत्मा
प्रकाश है, मुरशिद (पथ-प्रदर्शक गुरु) के दस्त हैं और उस दिलदार में दिल फजल (कृपा) हैं।
उस परमात्मा के प्रति अपनी आत्मा समर्पित करो जिससे उस साथी को इस बात की खबर हो जाए
और जब उसे रब (परमेश्वर) मार्ग पर ले आए तो वह मार्ग पहचान कर उस इसरार (परमेश्वर) को
पल भर में देख ले॥ २॥
हे शेख तकी मियाँ! वह अन्तरात्मा के कुफर (धर्म के प्रति दुर्भाव) खोले और आत्मा से
शून्याकाश को फोड़ दे॥ तुम इस प्रकार मलकूत (देवलोक) तथा नासूत (मृत्युलोक) को समझो और
जबरूत की इज्जत करो॥ ३॥