घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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अब तबक चौधा दिये हैं, आदि खुदा को जानिये ॥ २ ॥
कुल जहाँ आलम है कुन से, पट अबर अल्ला से है।
यह हर इक ना कोइ किसी पै, भेद दोस्ती दिल मिलै ॥ ३ ॥
महरम मियाँ मनसूर आशिक, वह है बेचूँ बेनमूँ।
यह किताबों में नहीं है, खुद खुदा का राज है ॥ ४ ॥
अर्थ-हे मियाँ! यह खुदा स्वयं कुदरत (प्रकृति) नहीं है-स्वयं खुदा (ईश्वर) इससे भिन्न कोई
अन्य और है। जिन खुदा को आदि शक्ति ने संसार का अधिक सौंप दिया, बताओ वह शख्स कौन है?
जिसने सबको दिल दिया, आत्मा को प्रकाश दिया, इस शरीर को सौन्दर्य प्रदान किया, जिसने
चौदह तबकों को आकाश के नीचे की धरती को प्रदान किया, उस आदि खुदा को समझें ॥ २ ॥
यह सम्पूर्ण संसार ईश्वर के मुँह से निकलने वाले शब्दों से सम्बद्ध हैं और इस सारे संसार का
नियंत्रण उसी ईश्वर से ही जुड़ा है यहाँ कोई किसी का नहीं है और दिल मिलने के बाद ही एक दूसरे से
लोग जुड़ जाते हैं।
लोग राज़दार हैं, उनके दिल की बातें मालूम नहीं होतीं और उनका प्रिय भी विलक्षण है और वह
ईश्वर तो बड़ा विलक्षण तथा सारे मन की बातें समझ लेता है। ये बातें किसी धर्मग्रन्थ में नहीं लिखी गई
हैं-यह ईश्वर का प्राकृतिक रहस्य है।
॥ पश्तो ३ ॥
ऐन अन्दर चश्म को रे, खोल देखो कौन है (म्याँ)।
कुल खलक आलम इसम बिच, दिल हिये में खसम है ॥ १ ॥
नहिं किताबों में रे है कुछ, कुल कुरानै छूछ है।
वह पिया आलम की आँखियाँ, और कहीं नहिं पूछ ले ॥ २ ॥
हुस्न है रे हंस जा से, हुस्न तन बिच में रहा।
भूल अपनी आद अव्वल, कट मेरे मन मौज में ॥ ३ ॥
होश गाफिल है रे दोजख, दिल दिया नहिं यार को।
बूझ बिल-आखिर खराबो, इश्क ज्यों मनसूर हो ॥ ४ ॥
अर्थ-हे मियाँ! ऐन (आँखों) के अन्दर अपने चश्म (नेत्र शक्ति) को खोल देखो। सम्पूर्ण सृष्टि में
उसका आलम (संसार) इसके बीच स्थित है और उसके दिल में उसका खसम (स्वामी) स्थित
है॥ २ ॥
हे मियाँ! इन कुरान जैसी किताबों में यह कुछ भी नहीं है और सारी कुरानें इस दृष्टि से खाली पड़ी
हैं॥ यदि कोई (सिद्ध साधक मिल जाए) मिल जाए तो उससे पूछो तो वह बताएगा कि वह ईश्वर
आलम (सृष्टि) की आँखों में ही है॥ २॥
हे हंस (आत्म) जिससे हुस्न (सौन्दर्य) बरकरार है और इस शरीर के बीच में हुश्न (सौन्दर्य)
बरकरार है तू आदि मूल आदिम स्थिति को भूल रहा है और मन की मौज में कटकर रहा है॥ ३॥
हे गाफिल (बेखबर) तुझे (इस नरक का होश नहीं है और उस परमात्मा रूपी मार को अभी तक
अपना दिल नहीं दिया है। अब अन्तिम समय की स्थिति के बारे में समझो-तुम्हारा प्रेम अब कैसे मनसूर
(एक साधक का नाम) हो॥