घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंघट रामायण / १३९
॥ तुलसी साहब बाच ॥
॥ दोहा ॥
तकी तोल जाना नहीं, कहौ कुरान की बात।
दिल दरियाप्त अपने करो, जो कुरान बिख्यात ॥ १ ॥
खुदा चून बेचून है, अस अस कहत कुरान।
बिन जुबान अल्ला मियाँ, कस कस किया बखान ॥ २ ॥
अल्ला अलिफ जुबान, बिना बदन जाहिर नहीं।
जुबाँ बदन के माहिं, तौ बेचूँ कहना नहीं ॥ ३ ॥
अर्थ-तुलसी साहब कहते हैं हे शेख तकी उस निर्णय को जानते नहीं और कुरान की बातें करते हो।
जो कुरान में विख्यात (सुप्रसिद्ध) है, उस तत्त्व की खोज अपने दिल में करो॥ १ ॥
ऐसा कुरान कैसे कह सकता है-अल्ला मियाँ ने बिना जुबान के ईश्वर (खुदा) स्वयं कुछ कह
सुन नहीं सकता।
कैसा-कैसा वर्णन कर दिया है, यह समझ में नहीं आता। कैसा ऐसा कैसा कर दिया है, समझ में
नहीं आता॥ २ ॥
अलिफ अल्ला की वाणी बिन मुख के कैसे प्रकाश में आई-अगर मुख में जुबान नहीं है तो कहने
का क्या आधार है॥ ३ ॥
॥ चौपाई ॥
तकी मियाँ हक बोल सुनावौ। अल्ला तौ बेचून बतावौ॥
उनके बदन जुवाँ नहिं भाई। कैसे कितेब कुरान बनाई॥
कागद स्याही कस लिख मारा। बिन जुबान कैसे बिस्तारा॥
अल्ला मियाँ कितेब बनाई। कहौ जुबाँ बिन कैसे गाई॥
ये तौ दिल बिच साँच न आवै। तुलसी तकी बोल नहिं भावै॥
बिन जुबान मुख कहा कुराना। अल्ला के नहिं बदन जुबाना॥
चूँ बेचून नमून न ज्वाबा। सुनौ तकी म्याँ कहै किताबा॥
वहि कितेब कह खुदा जुबाना। अल्ला मुख से भये कुराना॥
जो जुबान नहिं उनके भाई। तौ कस कहे कुरान बनाई॥
या की तकी तोल बतलावौ। दिल में समझ बूझ समझावौ॥
दिल और रूह राह बतलैयै। तब कुरान का गाना गैयै॥
रूह रकान असमान ठिकाना। केहि बिधि गई राह पहिचाना॥
सो घर का म्याँ भेद बतावौ। चौधा तबक तोल समझावौ॥
सुनकर तकी तका नहिं बोला। मुख भया बंद जुबाँ नहिं खोला॥
तुलसी कहै कहौ कस भाई। जा से दिल बिच होइ निसाई॥
सुनकर तकी ज्वाब अस दीन्हा। मुरसिद मियाँ मरम हम चीन्हा॥