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घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 131

१३८ / घट रामायण
॥ सम्बाद साथ तकी मियाँ के ॥
॥ चौपाई ॥
तुलसी कहै तकी सों बाता। या का तकी सुनौ बिख्याता ॥
चौधा तबक कुरान बताया। और चौबीस पीर पुनि गावाँ ॥
फजल मुहम्मद कीन्ह जहाना। आब तब पट अबर निदाना ॥
सुनौ तकी कहुँ खोज न पावै। कहा किताब ज्वाब नहिं आवै ॥
काजी मुल्ला पढ़े कुराना। खुदा खुदा कहे खोज न जाना ॥
कोलि कितेब देखिये भाई। खुदा आदि कहौ कहँ से आई ॥
खुद खुदाइ कर कहै कुराना। खुद खुदाई का मरम न जाना ॥
ये खुदाइ ना कहिये भाई। ये तौ खुद खुदाइ की छाँहीं ॥
जहँ खुदाइ रहता है साँईं। उस खुदाइ का अंत न पाई ॥
तकी खुदा तुम एक बतावो। खुद खुदाइ का खोज लगावो ॥
अर्थ—तुलसीदास शेख तकी से अपनी बात कहते हैं, हे शेख तकी! इस विख्यात तथ्य को आप सुनें।
कुरान ने चौदह तबक (आधार स्थल) बताया है और फिर चौबीस पीरों के विषय में गाया है।
मुहम्मद साहब की कृपा ने यह सृष्टि बनाई, सूर्य तथा आकाश उन्हीं के बनाए हैं। भिन्न-भिन्न
चौदह तबक (आधार स्थल) बतलाए गए हैं और उनके अलग-अलग पीर भी दिखाए गए हैं॥
किस तबक में किस नबी (ईश्वर के दूत) का निवास है। हे शेख तकी उस ईमान हक्क के विषय
में कहिये ॥
जहाँ वह स्वामी खुदा रहता है, उस खुदा का कोई अन्त नहीं पाता। हे तकी! तुम खुदा को एक बता
रहे हों और स्वयं उस खुदा की खोज लगाओ।
अल्लाह ने अपने मुख एवं जुबान से जो कुछ कहा उससे किताब कुरान (धर्मग्रन्थ) बना। भाई
पैगम्बर ने यह स्पष्ट किया कि सारा संसार उसकी खिलकत (सृष्टि) है। ॥
॥ सोरठा ॥
तुलसी तकी तलास, खुदा बास कहु कहँ हता।
नहिं जब जिमीं अकास, कोड़ किताब स्वाँसा नहीं ॥
अर्थ—तुलसी साहब कहते हैं कि हे तकी खोजो, कि खुदा की निवास स्थली कहाँ हैं। इस समय
वह कहाँ था, जब कोई धर्म ग्रन्थ नहीं था, न पृथ्वी थी न आकाश था और न वायु थी।
॥ दोहा ॥
मंसूरमियाँ पश्तो कहै तकी बूझ दिल माहँ।
खुद खुदाइ की राह का खुदा खोज नहिं पाइ ॥
अर्थ—मंसूर मियाँ पश्तों में यह बात समझाते हैं तू इसे दिल से समझो। स्वयं खुदा भी खुदा की तरह
की खोज नहीं कर पाता ॥