घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)
Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras
सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा
पृष्ठ 130, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंघट रामायण / १३७
मैं औगुन की खानि अपारा। तुम गुन सीतल अपरम्पारा॥
तुम पंडित मैं अपढ़ अयाना। करौ दया तुम कृपानिधाना॥
ये हिरदे कछु ज्ञान न पावा। औगुन ज्ञान जो तुम्हें सुनावा॥
सीतल भये धीर तब आई। सुनि अस बचन बैठि भुँइ माई॥
अर्थ-हृदय अहीर ने कहा, हे स्वामी सुनें, मैंने ज्ञानियों की रीति के अनुसार ही कुछ बातें कही हैं।
नैनू पंडित ने विचार कर कहा कि इन सबने ज्ञान की विलक्षण गति कही है। इस व्यक्ति ने तो धर्म, कर्म
को संसार से नष्ट कर दिया- यह कैसा ज्ञान है, जिसे आपका यह शिष्य (हृदय अहीर) कहता है। इसने
सम्पूर्ण वेदों, पुराणों आदि को निरर्थक बताया है तथा योगी एवं जैनियों का अस्तित्व ही नकार दिया
है॥ यह धर्म की अनेक बातों को नहीं मानता ऐसा कहकर उन्हें (हृदय अहीर का) ज्ञानमंत्र सुनाया॥
यह सुनकर, तुलसी साहब ने नैनू पंडित का अत्यन्त आदर किया और प्रीतिभाव से उठकर उन्हें
बैठने के लिए आसन दिया। उन्होंने नैनू पंडित से अपनी दीनता का वर्णन किया और उनके चरणों का
स्पर्श करके उसे अपने सिर पर रख लिया।
मैं तो अनाथ हूँ-मुझे आपका ही आधार है-आप क्षमा करें मैं तो आपका दास हूँ॥ मैं अपार
अवगुणों का भंडार हूँ और अपरम्पार शीतल गुणों के (भंडार) हो। आप पंडित ज्ञानी हैं और मैं अपढ़
और अज्ञानी हूँ-आप कृपा निधान हैं तुम मुझपर दया करों। इस हृदय ने किसी भी प्रकार के ज्ञान को
नही प्राप्त किया है जो इसने आपको सुनाया है वह पूर्णतः दोष भरा (अवगुण) ज्ञान है॥
इसे सुनकर वे लोग शीतल (शान्त) हुए और उनमें धैर्य (सहजता) आया और इन बातों को
सुनकर वे सभी भूमि पर बैठ गए॥
॥ सोरठा ॥
तकी तुरक कह बात तुलसी सुनियो भेद अब।
सब हृदय विख्यात जो गुनाह इनने कियो॥
अर्थ-तुर्क तकी ने यह बात कही कि हे तुलसी साहब! सारा रहस्य अब सुनो, जो पाप इस हृदय
अहीर ने किया है, वह सबको ज्ञात है।
॥ चौपाई ॥
सेख तकी जब बचन सुनाई। तुलसी सुनियौ चित्त लगाई॥
हिरदे कुफर बात सब कीन्हा। रोजा निमाज मेटि सब दीन्हा॥
और कितेब कुरान उठाये। खुदा नबी कर खोज मिटाये॥
अर्थ-शेख तकी ने जब यह बात सुनाई तो तुलसी ने ध्यान देकर बात सुनी। हृदय अहीर ने कुफ्र की
बातें की तथा रोजा तथा नमाज़ आदि सबको झूठा कह दिया। उन्होंने धार्मिक पुस्तकों और कुरान को
उठा (समाप्त घोषित कर) दिया और खुदा एवं नबी (ईश्वर के दूत) का अस्तित्व मिटा डाला॥
॥ सोरठा ॥
तुलसी तकी विचार, सब सँवारि विधि मैं कहौं।
कहुँ कुरान निरधार, जो किताब भाखी सबै॥
अर्थ-तुलसी साहब कहते हैं कि मैंने सब को सँवार कर विधिपूर्वक बातें कही हैं। कहीं कुरान
निराधार थोड़े है-उसका किताब में वर्णन तो सभी ने किया है॥