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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

घट रामायण / १३३
॥ सोरठा ॥
नैनू निरखि पुकार, सेख तकी को देखि कर।
ये का कहत गँवार, बिधि कुरान मानै नहीं॥
अर्थ-शेख तकी को देखकर नैनू ने पुकार कर कहा, यह गँवार क्या कह रहा है, यह कुरान शरीफ़
की व्यवस्था नहीं स्वीकार करता॥
॥ चौपाई ॥
नैनू कहै सुनौ मेहरबाना। बेद कितेब न मानै पुराना॥
राम रहीम एक नहिं मानै। पंडित काजी झूठ बखानै॥
अर्थ-नैनू पंडित ने कहा, हे मेहरबान? सुनें, यह वेद, शास्त्र एवं पुराणों को नहीं मानता। यह राम
तथा रहीम दोनों में से एक को भी नहीं मानता तथा पंडित एवं काजी दोनों को झूठ कहता है॥
॥ सोरठा ॥
हिरदे कही बिचारि, सेख तकी जो तुरक से।
तुम बूझौ दिल माहिं, खुदा एक सब में कहौ॥
अर्थ-हृदय अहीर ने अत्यन्त विचारपूर्वक उन शेख तकी तुर्क से कहा कि आप दिल से समझकर
बताइए-सभी ने खुदा को एक ही कहा है॥
॥ चौपाई ॥
हिरदै कहै तकी सुनु सेखा। सब में कहौ खुदा है एका॥
गाय मार बकरी तुम खइया। येहि किताब में कह्या गुसँइयाँ॥
सब में नूर मुहम्मद केरा। काटि गला पुनि पैहौ बैरा॥
येही कितेब कुरान बखाना। जिन्दा को मुरदा करि जाना॥
सोई मुसलमान है भाई। नवी नाम हर दम लौ लाई॥
रोजा कर कर खून बिचारा। ये गुनाह नहिं बक्सनहारा॥
झूठा रोजा झूठ निवाजा। झूठा अल्ला करै अवाजा॥
वा साहिब की राह न पाई। सब जहान में रहा समाई॥
अर्थ-हृदय अहीर ने कहा कि हे शेख तकी सुनें, कहते हैं, सभी में खुदा एक हैं। तुम गाय और
बकरी मारकर खाते हो, किस पुस्तक में ईश्वर द्वारा यह कहा गया है। सभी जीवों में मुहम्मद साहब
पैगम्बर का नूर (प्रकाश) है-उनका गला काटकर, उनका क्रोध ही प्राप्त करोगे।
क्या यही शास्त्र और कुरान में कहा गया है कि जीवित को मुर्दा मानकर समझो। मुसलमान वही
है-जो निरन्तर नबी के नाम की लौ लगाए रहता है। रोजा रख रखकर रक्तपात पर कभी विचार लिया
है, इस गुनाह (अपराध) को कोई क्षमा करने वाला नहीं है॥ रोजा भी झूठा है- नमाज भी झूठा है और
'अल्ला हो-अल्ला हो' की लगाई वाली आवाज भी झूठी है। उस साहब (स्वामी - ईश्वर) की कोई
राह नहीं पाया है-वह सारे संसार में समाया हुआ है॥