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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 125

१३२ / घट रामायण
अर्थ-हृदय अहीर ने उत्तर दिया कि सन्तों की गति कोई विरला ही पहचानता है-मैं तो अपढ़ एवं
अज्ञानी जाति का हूँ और आप लोग पंडित (ज्ञानी) हैं और वेद-पुराण पढ़ते रहते हैं॥
यदि आप लोग कहें तो मैं सन्तों की दशा का वर्णन करूँ, आप लोग उनकी गति की जानकारी
वेदों द्वारा नहीं प्राप्त कर सकते। पंडित जन पढ़-पढ़कर और कर्म-कर करके हार गए किन्तु सन्तों की
न्यारी गति का भेद वेदों ने नहीं दिया॥
॥ सोरठा ॥
नैनू कहै बिचार, यह निकाम कस भाखेऊ।
यह जड़ जाति गँवार, बेदन सों न्यारी कहै॥
अर्थ-नैनू पण्डित उस पर विचार करते हुए कहते हैं कि यह जड़ जाति का गँवार निष्काम तत्त्व को
कैसे बता सकेगा, (यह तो इसकी मूर्खता है कि) कि इसे वह वेदों से विलक्षण कह रहा है॥
॥ चौपाई ॥
नैनू सुनि पुनि मारनि धाये। पंडित और अनेक बुलाये॥
सब से कहै सुनौ तुम ज्ञाना। यह अहीर कस करत बखाना॥
सब पंडित मिलि यह बिधि ठानी। या की करौ प्रान की हानी॥
यह सब मिलि कर मता उठाई। हिरदे ऊपर लात चलाई॥
अर्थ-नैनू पण्डित यह सुनकर उसे मारने दौड़े और अनेक पंडितों को बुला लिया। उन्होंने सभी से
कहा कि तुम इसके ज्ञान को सुनो-यह अहीर उसका कैसे वर्णन कर रहा है। सब पंडितों ने इसे
सुनकर, ऐसा निश्चय किया कि इसके प्राण की हानि करो (मार डालो)। यह सुनकर ऐसा करने का
सभी ने निश्चय किया और हृदय अहीर के ऊपर लात चला दिए॥
॥ सोरठा ॥
तुरक तकी इक स्वार, जात हते दरबार को।
घोड़ा फेरि निहार, यह बिबाद कैसे भई॥
अर्थ-एक तुर्क मीर तकी नामक घुड़सवार (स्वार) दरबार के लिए जा रहे थे। उन्होंने घोड़े को
फेरकर देखा कि यह विवाद क्यों घटित हुआ॥
॥ चौपाई ॥
सेख तकी इक तुरुक सवारा। ते पुनि जात हते दरबारा॥
सुन करि बात बाग उन मोड़ा। फेरि लगाम कीन्ह उन घोड़ा॥
सेख तकी पूछी पुनि बाता। तैं कहु कौन कौन सी जाता॥
केहि कारन यह झगरा होई। सो सब भेद कहौ बिधि सोई॥
अर्थ-शेख तकी नामक एक सवार तुर्क जो वे उस समय राज दरबार में जा रहे थे, उन्होंने यह बात
सुनकर घोड़े की लगाम रोकी और लगाम को फिराकर घोड़ा उनकी ओर मोड़ दिया॥
तब शेख तकी ने उनसे यह बात पूछी-तुम बताओ, किस-किस जाति के हो। किस कारणवश यह
झगड़ा हो रहा है-यह सारा रहस्य मुझे बताओ॥