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सर्वकोश
घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 121

१२८ / घट रामायण
अर्थ-घट रामायण के सार तत्त्व के रूप में उस अगली गति का वर्णन इस प्रकार किया है। कोई
बूझने वाला ही इसे बूझ सकता है, किन्तु वह भी बिना सतगुरु के नहीं समझ सकता॥
॥ दोहा ॥
सतगुरु चरन निवास, निस दिन सूरति बसि रही।
संत चरन अभिलाष, पल छिन छिन छूटै नहीं॥ १॥
घट रामायन माहिं, अर्थ भेद अंदर सही।
रावन लंका राम, यह अकाम गति ना कही॥ २॥
अर्थ-सतगुरु के चरणों में निवास करते हुए प्रतिदिन सुरति ध्यान में चित्त बस रहा है और इस
प्रकार, सन्तों के चरणों की अभिलाषा एक दल और एक क्षण के लिए भी नहीं छूट पाती ॥ १ ॥
घट रामायण के अन्तर्गत सम्पूर्ण अर्थ तथा उसका रहस्य घट के अन्तर्गत हैं और वही ठीक भी है।
रावण, लंका एवं राम सभी उसके अन्दर ही हैं-यह समझ कामना रहित है और उसकी गति का वर्णन
नहीं किया जा सकता ॥ २ ॥
॥ सोरठा।
दसरथ सीता नाहिं, भरत सत्रगुन ना कह्यौ।
ये निरखौ घट माहिं, बाहिर गति मति भरम है॥ १॥
घट रामायन माहिं, घट बिधि गति मति सब कही।
परखै परम निवास, यह अकास अंदर मई॥ २॥
अर्थ-सीता तथा दशरथ बाहर नहीं है, भरत शत्रुघ्न भी बाहर नहीं कहे गए हैं। इन सबको घट में ही
देखो, इनके पिंड के बाहर होने की गति बुद्धि का भ्रम है॥ १॥
घट रामायण के अन्तर्गत मैंने पिंड (घट) की विधि, ज्ञान तथा समझ सबके विषय में बताया है
ताकि साधक इस घटाकाश में स्थित उनके रमणीक निवास को समझ सके ॥ २ ॥
॥ चौपाई ॥
रावन राम भेद समझाई। रामायन सब घट बिधि गाई॥
संत की गति अगति अगोई। अगम निगम घर सुरति समोई॥
संत गती गति बेद न जाना। सिम्रित सास्तर और पुराना॥
पंडित भेष भक्त और ज्ञानी। जोगी परमहंस नहिं जानी॥
स्रावग तुरक तोल नहिं पाया। भरमे सबहि काल गोहराया॥
अर्थ-रामायण में घट विधि के रूप में गाकर मैंने रावण तथा राम का भेद समझाया है। संतों की
गति अगम एवं स्पष्ट (अगोई) हैं। उनका अगम-निगममय घर सुरति ज्ञान में ही समाया हुआ है॥
सिद्ध (गती) सन्त का भेद वेद नहीं जानता-स्मृति (सम्रित) शास्त्र और पुराण भी नहीं समझते,
नाना प्रकार के वेष धारण करने वाले पंडित, भक्त और ज्ञानी योगी, परमहंस भी नहीं जानते-जैन
श्रावक, तुर्क भी उसे तौल नहीं पाते (मूल्यांकन नहीं कर पाते) वे सभी भ्रम में भ्रमण करते रहते हैं
और अन्त में काल (मृत्यु) उन्हें बुला लेती है।