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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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चेतावनी का अंग ३
अलिफ अलह कूँ याद कर कादिर कूँ कुरबान ।
साँई सेती तोड़ कर राखा अधम जहान ॥१९॥
अलिफ अलह कूँ याद कर जिन्ह कीन्हा यह साज ।
उस साहब कूँ याद कर पाला१ जल बिन नाज ॥२०॥
संसारी में आन कर कहा किया रे मूढ़ ।
सूआ सेमर सेइया लागे डोंड़े टूट ॥२१॥
सूआ सेमर सेइया बारह बरस बिसास२।
अंत चोंच खाली पड़ी डोंड़े बीस कपास ॥२२॥
सूआ सेमर सेइया ऐसे नर या देंह ।
जम किंकर तुझ लेगया मुख में देकर खेह ॥२३॥
आदि समय चेता नहीं अंत समय अँधियार ।
मद्ध समय माया रते पाकर लिये गँवार ॥२४॥
अंत समय बीतै घनी तन मन धरै न धीर ।
उस साहब कूँ याद कर जिन्ह यह धरा सरीर ॥२५॥
धूआँ का सा धौरहर बालू की सी भीत ।
उस खाविंद कूँ याद कर महल बनाया सीत ॥२६॥
धूआँ केरा धौरहर यह बालू का साज ।
उस खाविंद कूँ याद कर साजी गैब अवाज ॥२७॥
धूआँ केरा धौरहर बालू जेहा भेव ।
गैबी से गैबी मिलै तौ परसै दिल देव ॥२८॥
गैब अजाती पिंड में जा का गैबी नाँवँ ।
सुन्न सनेही जानिये मढ़ी महल नहिं ठावँ ॥२९॥
भगति हेत गृह बँधिया माटी महल मसान ।
तैं साहब जाना नहीं भूला मूढ़ जहान ॥३०॥
भगति हेत गृह बँधिया घन नामी घट माहिं ।
बिन सतगुरु की बंदगी साहब पावै नाहिं ॥३१॥
(१) पालन किया। (२) बिस्वास।