गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 78, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ें७० गरीबदास जी की बानी
॥ निश्चय का अंग ॥
अपने दिल साधू नहीं वा कूँ दरसा साध ।
भैंस सींग से जानिये गत कुछ अगम अगाध१ ॥ १ ॥
उसके मन की फुरत है अपने मनकी नाहिं ।
गनिका चढ़ी बिमान में अजामील की बाँहि२ ॥ २ ॥
तीन धात हैं पिता की चार धात हैं माय३ ।
सिष स्वामी इकसा मिलै हंसा पहुँचै ठाँय ॥ ३ ॥
निःचय ऊपर नामदेव पाहन दूध पिलाये ।
भैंस सींग में साहब आये नाम रतन धन पाये४ ॥ ४ ॥
निःचय ही से देवल फेरा पूजो क्यों न पहारा ।
नामदेव दरवाजे बैठा पंडित के पिछवारा ॥ ५ ॥
(१) देखो नोट पृष्ठ २० । (२) अजामिल के कुकर्मी होने और अन्त में नारायण
नाम के प्रताप से तर जाने की कथा नोट पृष्ठ २१ में लिखी है परन्तु उसकी बदौलत
उसकी बेश्या का भी उद्धार होने का प्रमान कहीं नहीं पाया जाता । (३) बालक में पिता
और माता दोनों के अंश से तीन तीन बस्तु की उत्पत्ति लिखी है— पिता के अंश से
हड्डी रग और मज्जा (या गूदा) और माँ से बाल लोहू और मांस, चौथी वस्तु माँ के
अंश से कौन सी बनी है इसका प्रमान हम को कहीं नहीं मिला । महात्मा चरनदास
जी ने पिता के अंश में रग की जगह बीर्ज लिखा है और माता के अंश में बाल की
जगह त्वचा ।
(४) नामदेवजी की प्रचंड भक्ति जगत-प्रसिद्ध है। यह बामदेव जी की विधवा कन्या
के उदर से भगवंत की दया दृष्टि से हजरत ईसा की भाँत जनमे थे । इन के नाना भी
बड़े भक्त और माता पूरी सती और प्रेमी थीं। नामदेवजी के विषय में बहुत से चमत्कार
लिखे हैं । लड़कपन ही से इन की परमार्थ में रुचि थी और उसी अवस्था में एक बार
उनके नाना ठाकुर जी की सेवा उनके सुपुर्द कर के बाहर गये । जब नामदेवजी ने ठाकुर
जी के सामने दूध धरा और उन्होंने न पिया तो इन्होंने समझा कि हमसे अप्रसन्न हैं
और तीन दिन तक मन्दिर में बिना अन्न पानी के दुखी पड़े रहे अंत को ठाकुर जी ने
कटोरा उनके हाथ से लेकर दूध पी लिया और थोड़ा सा उनको प्रसाद दिया ।
किसी मेले के समय में नामदेव जी अपना जूता कमर में बाँध कर पंढरपुर के
ठाकुरद्वारे में दर्शन को गये संयोग से जूता किसी ने देख लिया और इन को मार कर
मन्दिर से निकाल दिया । बेचारे मंदिर के पीछे जाकर दर्शन न मिलने से व्याकुल होकर
बैठ गये और वहाँ विनती करने लगे उसी दम मंदिर जड़ से फिर कर द्वारा उनकी
ओर हो गया ।