गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६ गरीबदास जी की बानी
भँवर गुफा में बैठ कर अमी महा रस जोख ।
ऐसा सतगुरु मिल गया सौदा रोकम रोक१ ॥७६॥
भँवर गुफा में बैठ कर अमी महा रस तोल ।
ऐसा सतगुरु मिल गया बजर पौरि दइ खोल ॥७७॥
भँवर गुफा में बैठ कर अमी महा रस जोख ।
ऐसा सतगुरु मिल गया लेगया हम परलोक ॥७८॥
पिंड ब्रह्मांड से अगम है न्यारी सिंधु समाध ।
ऐसा सतगुरु मिल गया देखा अगम अगाध ॥७९॥
पिंड ब्रह्मांड से अगम है न्यारी सिधु समाध ।
ऐसा सतगुरु मिल गया दिया अच्छय परसाद ॥८०॥
औघट घाटी ऊतरे सतगुरु के उपदेस ।
पूरन पद परकासिया ज्ञान जोग परबेस ॥८१॥
सुन्न सरोवर हंस मन न्हाये सतगुरु भेद ।
सुरत निरत परचा भया अष्ट कमल दल छेद ॥८२॥
सुन बेसुन से अगम है पिंड ब्रह्मांड से न्यार ।
सब्द समाना सब्द में अवगत वार न पार ॥८३॥
सतगुरु कूँ कुरबान जाँ अजब लखाया देस ।
पारब्रह्म परवान है निरालंब निज बेस ॥८४॥
सतगुरु सोहं नाम दे गुफ़२ बीज बिस्तार ।
बिन सोहं सीझे३ नहीं मूल मंत्र निज सार ॥८५॥
सोहं सोहं धुन लगे दरद मंद दिल माहिं ।
सतगुरु परदा खोलहीं परा लोक ले जाहिं ॥८६॥
सोहं जाप अजाप है बिन रसना है धुन्न ।
चढ़ै महल सुख सेज पर जहाँ पाप नहिं पुन्न ॥८७॥
(१) नकदा नकदी । (२) गुप्त । (३) पैवस्त न हो ।