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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 182

१७२ गरीबदास जी की बानी
बिनमसि१ का इक अंक अरस२ में, क्या पाढ़ये पोथी पाना३ ॥७॥
संख कँगूरा४ बाजैं तूरा, सेत धजा लख असमाना ॥८॥
उजल हिरंबर सब्द घुरंबर५, जम जोरा नहिं तलबाना ॥६॥
गंगा जमुना मद्ध सुरसती, मान सरोवर में न्हाना ॥१०॥
मोछ मुक्त जहँ पित्र होत हैं, वहाँ करो पिंड परदाना६ ॥११॥
अर्थ धर्म सब काम मोछना, आद पुरुष पद निरबाना ॥१२॥
गरीबदास दरपन मुख दरवै७, संख कला रवि ससि भाना ॥१३॥
( ३ )
मन मगन भये का सुन रासा ॥ टेक ॥
यह इंद्री परकिरती प्रेरै, डार चलै तिरगुन पासा ॥१॥
सफम सफा८ है मिले नूर में, काम क्रोध का कर नासा ॥२॥
यह तन खाक मिलेगा भाई, क्या पहिरे मलमल खासा ॥३॥
पिंड ब्रह्मांड कुछ थीर नहीं है, गगन मँडल में कर बासा ॥४॥
चिंता चेरी दूर परै री, काट चलो जम का फाँसा ॥५॥
मान बड़ाई जमपुर जाई, होय रहो दासन दासा ॥६॥
गरीबदास पद अरस अनाहद, ओअं सोहं जप स्वासा ॥७॥
( ४ )
मन मगन भया सो ब्रह्मचारी ॥ टेक ॥
यहमन अकल अजीत जीतिया, दमन९ करी पाँचो नारी ॥१॥
दुरमत का तो देवल१० ढाहा, पकर लई मनसा दारी११ ॥२॥
चित के अंदर चौपड़ खेलै, जहँ फिरती सोलह सारी१२ ॥३॥
जा की नरद पकी घर आवै, गर्भ बास में ना जा री ॥४॥
जोनी संकट मोछ होत है, उतर गये भौजल पारी ॥५॥
दुहूँ दीन षट दरसन त्यागे, ऐसी ही धारन धारी ॥६॥
(१) सियाही। (२) अर्श। (३) पन्ना, बरफ। (४) छोटे छोटे बुर्ज। (५) घिर रहा है।
(६) प्रदान। (७) दरसै। (८) साफ से साफ। (९) जेर। (१०) मंदिर। (११) नारी।
(१२) नरद, गोटी।