सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 186 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 16

१० गरीबदास जी की बानी
ऐसा सतगुरु हम मिला गलताना१ गुलजार ।
वार पार की मत नहीं नाहिं हलका नाह भार ॥१०॥
ऐसा सतगुरु हम मिला सुरत सिंधु के मंझ ।
अण्डों आनंद पोख ही बैन सुनाये कुंज२ ॥११॥
ऐसा सतगुरु हम मिला सुरत सिंधु के नाल ।
पीतम्बर ताखी३ धरयो बानी सब्द रसाल४ ॥१२॥
ऐसा सतगुरु हम मिला सुरत सिंधु के नाल ।
गमन किया परलोक से अललपच्छ की चाल ॥१३॥
ऐसा सतगुरु हम मिला सुरत सिंधु के नाल ।
ज्ञान जोग औ भगति सब दीन्हीं नजर निहाल ॥१४॥
ऐसा सतगुरु हम मिला बेपरवाह अबंध ।
परम हंस पूरन पुरुष रोम रोम रबि चंद ॥१५॥
ऐसा सतगुरु हम मिला है जिंदा जगदीस ।
सुन्न बिदेसी मिल गया छत्र मुकुट है सीस ॥१६॥
सतगुरु के लच्छन कहूँ मधुरे बैन विनोद ।
चार बेद षट सास्तर कहा अठारह बोध ॥१७॥
सतगुरु के लच्छन कहूँ अचल बिहंगम चाल ।
हम अमरापुर ले गया ज्ञान सब्द के नाल ॥१८॥
ऐसा सतगुरु हम मिला तुरिया के रे तीर ।
सब विद्या वानी कहै छानै नीर अरु छीर ॥१९॥
जिंदा जोगी जगत-गुरु मालिक मुरसिद पीव ।
काल कर्म लागै नहीं संका नाह सींव५ ॥२०॥
जिंदा जोगी जगत गुरु मालिकै मुरसिद पीर ।
दुहूँ दीन झगड़ा मचा पाया नहीं सरीर६ ॥२१॥
(१) मतवाला। (२) कुंज चिड़िया अपने अंडे को बैठकर नहीं सेती बल्कि सुरत
से। (३) टोपी। (४) रसीला। (५) हद। (६) कहते हैं कि कबीर साहब के चोला छोड़ने