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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 156

१४६ गरीबदास जी की बानी
राम नाम पहलाद पढ़े थे, हिरनाकुस नहिं भाये ।
नरसिंह रूप धरे नारायन, खंभ फार कर आये१ ॥ ४ ॥
नामदे नाम निरंजन राते, जाकी छान छवाई ।
एक पलक में देवल फेरा, मिर्तक गऊ जिवाई२ ॥ ५ ॥
कासीपुरी कबीरा होते, ताहि लखो रे भाई ।
जहाँ केसो बनजारा उतरा, नौलख बालद आई ॥ ६ ॥
कनक जनेऊ कन्ध दिखाया, भक्ति करी रैदासा ।
दासगरीब कौन गत पावै, मगहर मुक्ति बिलासा ॥ ७ ॥
( ३ )
मन तूँ मान सरोवर न्हा रे, इहाँ न भटका खारे ॥ टेक ॥
सूरज मुखी फूल जहाँ फूलै, संख पदम उँजियारा ।
गंगा जमुना मद्ध सरसुती, तिरबेनी की धारा ॥ १ ॥
जहाँ कमोदनि चन्द्र उगत हैं, कमल कमल मध तूरा३ ।
अनहद नाद अजब धुन होहीं, जानै सतगुरु पूरा ॥ २ ॥
ओघट घाट बिषम है दरिया, न्हावै संत सुजाना ।
मोच्छ मुक्ति की परबी लै रे, साखी है ससि भाना ॥ ३ ॥
जहाँ उहाँ हंस कुतूहल करते, मोती मुक्ता खाहीं ।
ऐसा देस हमेस हमारे, अमृत भोजन भाहीं४ ॥ ४ ॥
संखों लहर मिहर की उपजै, कहर नहीं जहाँ कोई ।
दास गरीब अचल अबिनासी, सुख का सागर सोई ॥ ५ ॥
( ४ )
बाबा बिकट पंथ रे जोगी,
तातें छाँड़ सकल रस भोगी ॥ टेक ॥
पर्थम सिद्धि गनेस मनावों, मूल कमल की मुद्रा ।
किलियं जाप जपो हरि हीरा, मिटै करम सब छुद्रा५ ॥ १ ॥
(१) देखो नोट पृष्ठ ७३ (२) देखो पृष्ठ ७० । (३) तुरही । (४) रुचते हैं । (५) नीच ।