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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 154

१४४ गरीबदास जी की बानी
हाड़ चाम सकल गाम, गंद है खलीता१ ।
पाक तो बिसार दीन, बरहना जरीता२ ॥ १ ॥
दम का सुमार कीन, नाम क्यूँ न लीता ।
इला पिगला बिचार, सुखमना पलीता३ ॥ २ ॥
सील और संतोष आन, दया धरम कीता ।
काम क्रोध लोभ मोह, सत्त्रु क्यों न जीता ॥ ३ ॥
साहब दिल से बिसार, कौन जुलम कीता ।
दुनिया गुफ्तार४ यार, बाँड़ दे अनीता ॥ ४ ॥
नाहीं वह स्याम सेत, लाल है न पीता५ ।
आवै नहिं पारख६, पढ़ो कोट ज्ञान गीता ॥ ५ ॥
पिंड प्रान अरप दीन, सतगुराँ सरीता७ ।
गरीबदास पावै यूँ, ब्रह्म पद अतीता ॥ ६ ॥
( ५ )
राम सुमिर राम सुमिर, राम सुमिर लै रे ।
जम और जहान जीत, तीन लोक जै रे ॥टेक॥
इंद्री अदालत चोर, पकड़ो मन आहि८ रे ।
अनहद टंकोर घोर, सुनै क्यूँ न बहिरे ॥ १ ॥
सुरत निरत नाद बिंद, मन पवना गहि रे ।
उनमुनी अलेल९ रूप, निराकार लहि रे ॥ २ ॥
धनुष१० ध्यान मार बान११, दुरजन से फहरे१२ ।
देखत के सीत कोट, भरम बुजे ढह रे ॥ ३ ॥
साँचे से प्रीत कीन, झूठा मन मह१३ रे ।
कहत है गरीबदास, कुटिल बचन सह रे ॥ ४ ॥
(१) थैली, झोला। (२) नंगा जलाया जायगा। (३) बत्ती जिससे रंजक में आग
लगाते हैं। (४) निरी बात, कहानी। (५) पीला। (६) परख, जाँच । (७) शरन ली।
(८) साँप। (९) बेपरवाह। (१०) कमान। (११) तीर। (१२) दूर रहो, बचो। (१३) मथ
लो अर्थात् छाछ की तरह अलग कर दो।