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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 153

राग रामकली १४३
( ३ )
राम सुमिर राम सुमिर राम सुमिर बौरे ।
हर दम तो अजपा जाप साहबै भजो रे ॥ टेक ॥
इंद्री घट पाँच भूत, दूत हैं दिवाने ।
पच्चिस परकिर्त१ लार जाने तीन जाने ॥ १ ॥
काम सहर क्रोध कहर लोभ लहर ऊठैं ।
मोह के तो परे फंद कैसे कर टूटैं ॥ २ ॥
सेन दल अपार यार एती ठकुराई ।
कैसे कर पड़ा जाय गढ़ सुरंग लाई ॥ ३ ॥
अकड़ी२ हठवान३ बाँका जोधा मन राजा ।
कोट तो निसान घुरैं बजैं अनँत बाजा ॥ ४ ॥
सेन दल अपार सजे संख लहर लहरी ।
खसिया४ मन राज करै मरद है न मेहरी५ ॥ ५ ॥
सुरग और पताल मिरत तिहूँ लोक लूटे ।
सतगुरु की सरन आये सोई जान छूटे ॥ ६ ॥
काया गढ़ नहीं तेरा देंह साँच मानी ।
भाड़े६ की दुकान यार सो तो है बिरानी ॥ ७ ॥
दूने तीने नाहिं कीन्हे हाट बीच टोटा ।
पकरैंगे जम जहूद तोरैंगे लँगोटा ॥ ८ ॥
होयगा बेवतन७ हंस देह जार दीनी ।
गरीबदास कहाँ बास पंथ खोज मीनी ॥ ६ ॥
( ४ )
राम सुमिर राम सुमिर, राम सुमिर मीता ।
बिन सतगुरु ज्ञान ध्यान, खाली है सलीता८ ॥टेक॥
(१) प्रकृति । (२) हेकड़ । (३) हठीला । (४) बधिया, हिजड़ा । (५) स्त्री । (६)
किराया । (७) बिना घर का । (८) बोरा ।