गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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नाद बिन्द घट अकार देह गेह नाहीं ॥
निरमल निरदंद ऐन, देखतही होत चैन, पलकन के माहीं ।७।
आदि मूल रतन फूल सेत पद सुभाना ॥
गरीबदास जहाँ बास दरस में दिवाना ॥ ८ ॥
( २ )
राम सुमिर राम सुमिर राम सुमिर लोई ।
सतगुरु उपदेस दीन्ह भक्ति बीज बोई ॥ टेक ॥
काम क्रोध लोभ मोह सत्रु हैं तुम्हारे ।
हरष सोग राग दोष पकर क्यों न मारे ॥ १ ॥
तीन चीन्ह पाँच मार पकरो मठधारी१।
पुत्र तो पचीस संग सैन है अपारी ॥ २ ॥
पाँच नार घट मँझार मन की पटरानी ।
द्वादस दल कोट कटक सेन२ है बिरानी ॥ ३ ॥
साहुकार पकर लीन्ह लूटै गढ़ चोरा ।
आतम तो अनाथ सुनो राम बाप मोरा ॥ ४ ॥
मन के सब राज पाट तीन लोक माहीं ।
आतम तो अनाथ जीव सुनो हो गुसाईं ॥ ५ ॥
फंद काट करो साँट३ मौज मेहरबाना ।
अरज तो कबूल होय साहब रहमाना४ ॥ ६ ॥
साहब दरबार बीच कूकै बंदिजादा५ ।
महजर६ क्यूँ न सुनो राम पूछ हो फिलादा७ ॥ ७ ॥
समरथ जगदीस ईस, सरन आया तोहीं ।
ठाढ़ा दरबार तोरे सुनो राम दोही८ ॥ ८ ॥
अर्थ धर्म काम मोच्छ पूरन सब काजा ।
गरीबदास सरन आया बाप राम राजा ॥ ६ ॥
(१) महंत यानी मन । (२) फौज । (३) मेला । (४) दयाल । (५) दास । (६)
अर्जी । (७) फर्याद । (८) दुहाई ।