सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 186 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 151

राग रामकली १४१
ज्ञान ध्यान जिस धाम न पहुँचै, साखी सब्द सरीर ।
सुन्न असुन्न परम सुन चीन्हों, औंडी१ मँजिल कबीर ॥ ६ ॥
सप्त सुन्न पर संखा झालर, अछर घाम की डोर ।
मकर तार की बीन चीन्ह कर, होना गारतगोर ॥१०॥
पाँच तत्त तीनों गुन नाहीं, धर२ अंबर३ नहिं धौल४ ।
चन्द्र सूर नहिं पावक पानी, बङ्की नगरी पौल५ ॥११॥
मेटो खोज बोझ सब डारो, मिलिहो निरगुन तान ।
दास गरीब परम रंग भीना, चीन्हा पद निरबान ॥१२॥
॥ राग रामकली ॥
राम सुमिर राम सुमिर राम सुमिर हंसा ॥
भक्ति जान ज्ञान ध्यान छाँड़ो कुल बंसा ॥टेक॥
कोट करम भरम जारि पार तोहि उतारै ॥
मुक्ति लोक पाय मोक्ष नाम जो उचारै ॥ १ ॥
सुरत सिंध कोट चंद्र झलकै पल माहीं ॥
पद निर्बान है अमान आदि अंत नाहीं ॥ २ ॥
निराकार अधर धार वार पार नाहीं ॥
ब्यापक महबूब खूब धूप है न छाहीं ॥ ३ ॥
संख तूर दर जहूर मिल मिल मिल रंगा ॥
घुरै नाद संख साध चरन कोट गङ्गा ॥ ४ ॥
अरस कुरस नूर दरस तेज पुंज देखा ॥
कोट भानु साँच मानु रोम रोम पेखा ॥ ५ ॥
अमृत रस अमी पीव खुरदनी खुसाली ॥
प्याले मुसताक पाक लालन सिर लाली ॥ ६ ॥
(१) गहिरी, अड़बड़। (२) धर = धरा अर्थात् पृथ्वी। (३) आकाश। (४) धवल के
अर्थ सफेद के हैं—यहाँ धवलागिरि से मतलब हो, या धौल = धूल अर्थात् परमाणु रूप
माया से। (५) द्वार।
१६