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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 186 में से

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पृष्ठ 138

१२८ गरीबदास जी की बानी
फूँक दिया मैदान में, कुछ लेन न देना रे ॥ २ ॥
मुगदर मारै सीस में, जम किंकर दहना रे।
उतर चला तागीर१ हो, ज्यूँ मरदक सहना२ रे ॥ ३ ॥
फूला सो कुम्हलात है, चुनिया सो ढहना३ रे।
चित्रगुप्त लेखा लिया, जब कागद पहना४ रे ॥ ४ ॥
चलिये अब दीवान में, सतगुरु से कहना रे।
मुसकिल से आसान हो, ज्यूँ बहुर मरै ना रे ॥ ५ ॥
बोया अपना सब लुनै५, पकरैं हम अहना६ रे।
चरन कमल के ध्यान से, छूटै सब फैना७ रे ॥ ६ ॥
परानन्दनी८ संग है, जाके कमधैना९ रे।
गरीबदास फिर आवही, जो अजर जरै ना रे ॥ ७ ॥
( ४ )
भजन कर राम दुहाई रे ॥ टेक ॥
जनम अमोला तुझ दिया, नर देही पाई रे।
देही कूँ या ललचहीं, सुर नर मुनि भाई रे ॥ १ ॥
सनकादिक नारद रटैं, चहुँ बेदा गाई रे।
भक्ति करै भवजल तरै, सतगुरु सरनाई रे ॥ २ ॥
मिरगा१० कठिन कठोर है, कहो कहाँ दहकाई११ रे।
कस्तूरी है नाभ में, बाहर भरमाई रे ॥ ३ ॥
राजा बूड़े मान में, पंडित चतुराई रे।
ज्ञान गली में बंक१२ है, तन धूर मिलाई रे ॥ ४ ॥
उस साहब कूँ याद कर, जिन सौंज१३ बनाई रे।
देखत ही हो जात है, परबत से राई रे ॥ ५ ॥
(१) तंग । (२) मसल मशहूर है “उतरा शहना मर्दक नाम”। (३) जो घर चुना
या बनाया जाता है वह कोई दिन गिर जायगा । (४) लंबा चौड़ा । (५) काटै। (६) लोहा ।
(७) फन्दा । (८) परम आनन्द या रस की खान । (६) कामधेनु । (१०) मन । (११)
धोखा खाया । (१२) टेढ़ाई, पेच । (१३) साज ।