सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 135, कुल 186 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 135

राग बिजोग १२५
( ५ )
जो सूते सो जना बिगूते१, जागे सोई जगे हैं ॥टेक॥
सूरे तेई नगर पहुँचे, कायर उलट भगे हैं।
नौवें द्वारे दरस दरीबा२, दसमें ध्यान लगे हैं ॥ १ ॥
सुन्न सहर में हुई सगाई, हमरे हंस मँगे हैं।
निरगुन नाम निरालंब चीन्हो, हमरे साध सगे हैं ॥ २ ॥
बिन मुख बानी सतगुरु गावै, नाहीं दस्त३ पगे४ हैं।
दास गरीब अमर पुर डेरे, सत्त के दाग दगे हैं ॥ ३ ॥
( ६ )
नाम निरंजन नीका, साधो नाम निरंजन नीका ॥टेक॥
तीरथ बरत थोथरे५ लागैं, जप तप संजम फीका ॥ १ ॥
भजन बंदगी पार उतारै, समरथ जीवन जी का ॥ २ ॥
करम कांड ब्योहार करत है, नाम अभय पद टीका ॥ ३ ॥
कहा भयो छत्र की छाँह चलैया, राज पाट दिहली का ॥ ४ ॥
नाम सहित बेवतन भला है, दर दर माँगे भीखा ॥ ५ ॥
आदि अनादि भक्ति है नौधा६, सुनो हमारी सीखा ॥ ६ ॥
गरीबदास सतगुरु की सरनै, गगन मँडल में दीखा ॥ ७ ॥
॥ राग बिजोग ॥
सुनियो संत सुजान, दिया मैं हेला रे ॥टेक॥
और जनम बहुतेरे होंगे, मानुष जनम दुहेला७ रे ॥ १ ॥
तू जकिहै८ मैं लसकर जोरों, चलना तुझे अकेला रे ॥ २ ॥
अरब खरब लग माया जोरी, संग न चलसी धेला रे ॥ ३ ॥
या तो मेरी सत की निबरिया, सतगुरु पार पहेला रे ॥ ४ ॥
दास गरीब कहै रे संतो, सब्द गुरू चित चेला रे ॥ ५ ॥
(१) बिगड़े। (२) हाट। (३) हाथ। (४) पाँव। (५) थोथे। (६) नौ प्रकार की।
(७) कठिन। (८) बिचारता है।
१७