गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२४ गरीबदास जी की बानी
जिस दगड़े पंडित उठ चालै, पीछे पड़ गया गैला१ ।
औघट घाटी पंथ बिकट है, जहाँ हमारी सैला ॥ २ ॥
बिनय बंदगी म्हेसा२ कीजै, बोक३ बनै के खैला४ ।
कूकर सूकर खर कीजैगा, छ्वाँड़ सकल बद फैला५ ॥ ३ ॥
घरही कोस पचास परत हैं, ज्यूँ तेली के बैला ।
पीसत भाँग तमाखू पीवै, मूरख मुख सूँ मैला ॥ ४ ॥
सहस इक्कीसौ छःसै दम है, निस बासर तूँ लैला६ ।
गरीबदास सुन पार उतर गये, अनहद नाद घुरैला७ ॥ ५ ॥
( ३ )
घट ही में चंद चकोरा, साधो घट ही चंद चकोरा ॥टेक॥
दामिन दमकै घनहर८ गरजै, बोलै दादुर मोरा ।
सतगुरु गस्ती गस्त फिरावै, फिरता ज्ञान ढँढोरा ॥ १ ॥
अदली राज अदल बादसाही, पाँच पचीसो चोरा ।
चीन्हो सब्द सिंध घर कीजै, होना गारतगोरा ॥ २ ॥
त्रिकुटी महल में आसन मारो, जहँ न चलै जम जोरा ।
दास गरीब भक्ति को कीजो, हुआ जात है भोरा६ ॥ ३ ॥
( ४ )
घट से दरस जहूरा, साधो घट से दरस जहूरा ॥टेक॥
कायर कीर उलट कर भागे, पहुँचेगा कोइ सूरा ।
गगन मँडल में अनहद बाजै, भनकैं झीने तूरा१० ॥ १ ॥
त्रिकुटी महल में ध्यान समोवो, झिलमिल झिलमिल नूरा ।
अगर दीप में आसन मारो, मिट गई जम की घूरा११ ॥ २ ॥
संख पदम जहँ परघट देखे, मुरसिद मिलिया पूरा ।
दास गरीब अटल जागीरा, काढ़ कौन कसूरा ॥ ३ ॥
(१) जिस रास्ते पर पंडित चलते हैं उसी पर सब चलने लगते हैं। (२) हमेशा ।
(३) भारी बकरा । (४) साँड़ । (५) कुकर्म । (६) लेता है । (७) जिसकी अन्तर में धुन
हो रही है । (८) बादल । (६) सबेरा । (१०) तुरही । (११) टेढ़ी निगाह ।