गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 133, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीन पदम जाके भगवाना। सप्त नील¹ कन्हवा² सँग जाना ॥
तीस कोट सीता सँग चेरी। सप्त नील राधा दें फेरी ॥
(जाके) अर्ध रूप पै सकल पसारा। ऐसा पूरन ब्रह्म हमारा ॥
दास गरीब कहै नर लोई। यह पद चीन्है बिरला कोई ॥
॥ दोहा ॥
सतबादी सब संग हैं, आप आपने धाम।
आजिज³ की अरदास⁴ है, सकल संत परनाम ॥
॥ राग कल्यान ॥
सेस सहस मुख गावै, साधो सेस सहस मुख गावै ॥टेक॥
ब्रह्मा बिस्नु महेसर थाके, नारद नाद बजावै।
सनक सनंदन ध्यान धरत हैं, दृष्ट मुष्ट नहिं आवै ॥ १ ॥
लघु दीरघ कछु कहा न जाई, जो पावै सो पावै।
जी⁵ जूनी कूँ कैसे दरसै, गौरज सीस चढ़ावै ॥ २ ॥
ब्रह्म रंध्र का घाट जहाँ है, उलट खेचरी⁶ लावै।
सहस कमल दल झिलमिल रंगा, चोखा फूल चुवावै ॥ ३ ॥
गंगा जमना मद्ध सरसुती, चरन कमल से आवै।
परबी कोटि परम पद माहीं, सुख के सागर न्हावै ॥ ४ ॥
सुरत निरत मन पौन पदारथ, चारो तत्त मिलावै।
आकासै उड़ चलै बिहंगम, गगन मँडल कूँ धावै ॥ ५ ॥
मोर मुकुट पीताँबर राजै, कोटि कला छबि छावै।
अबरन बरन तासु के नाहीं, बिचरत हैं निरदावै ॥ ६ ॥
बिनही चरनों चलै चिदानंद, बिन मुख बैन सुनावै।
गरीबदास यह अकथ कहानी, ज्यूँ गूँगा गुड़ खावै ॥ ७ ॥
कबहुँ न होवे मैला नाम धन, कबहुँ न होवे मैला।
चेतन होकर जड़ कूँ पूजै, मूरख मूढ़र बैला ॥ १ ॥
(१) नील = एक सौ खरब । (२) कन्हैया या कृष्ण । (३) आधीन । (४) अर्जदाश्त,
प्रार्थना । (५) जीव । (६) नाम एक मुद्रा का ।